गौठान नाम बर्दाश्त नहीं तो, कम से कम गौशाला या कांजी हाउस के रूप में ही बदलाव कर घुमंतू गायों की करें देखभाल..

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गौठान तबाह हुए या चढ़े भ्रष्टाचार की भेंट बेचारे बेजुबान आवारा पशुओं ( गायों ) का क्या दोष

ध्वस्त तबाह पड़े गौठानों को सरकार करें गों सेवकों के हवाले, गौ सेवक करेंगे जतन व अवारा गायों की देखभाल!

शैलेश शर्मा :;घरघोड़ा– पिछले कार्यकाल कांग्रेस की सरकार भूपेश बघेल के नेतृत्व में आवारा बेजुबान जानवरों गायों के प्रति दया करुणा श्रद्धा रखते हुए छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसी कोई शानदार योजना बनाई थी और योजना को जमीनी स्तर में शीघ्र ही लागू कर करोड़ों रुपए गौठान योजना नाम के अंतर्गत स्वीकृत भी की थी.

जिस योजना के अंतर्गत आवारा पशु गायों के चारा की व्यवस्था स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं आदि देखभाल की व्यवस्थाएं की योजना थी सरकार ने अच्छी सोच के साथ इस योजना को बड़े ही दिलेरी से लागू किया था परंतु कई जगह यह योजना बृहद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई जिसकी जांच जो सरकार योजना बनाई थी वही सरकार जांच से पल्ला झाड़ ली.

वहीं वर्तमान भाजपा की  सरकार गौठान के मामलों में बिल्कुल ही निरंकुश नजर आ रही है आवारा पशुओं के लिए किसी प्रकार की कोई योजना फिलहाल कारगार साबित नहीं हो रही, ऐसे में छत्तीसगढ़ के तमाम शहरों एवं कस्बों, गांवों में आवारा पशु गायों की संख्या में बढ़ोतरी होते हुए बेलगाम हो रहे हैं जिससे कि किसानों के फसले भी नुकसान हो रही है.

और मुख्य सड़कों में आवारा पशु गाय गौठान या कांजी हाउस के अभाव में गुजारा के लिए डेरा नहीं मिलने की वजह से सड़कों पर दिन रात बैठे रहते हैं जिसके वजह से वाहनों की चपेट में आकर आवारा पशु गायों की जाने जा रही है इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए भाजपा सरकार को त्वरित निर्णय ले के गौठानों के विकल्प में गौशाला या कांजी हाउस के रूप या कोई अन्य गायों की सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए योजना बनाएं.

या फिर ध्वस्त उजड़े गौठानों कांजी हाउस को गौं सेवकों के हवाले आवारा पशु गायों की सेवा जतन के लिए अस्थाई रूप से सुपुर्दगी करें जिससे गाय माता की सुरक्षा रक्षा के साथ-साथ उनकी देखभाल भी होगी और गायों की सेवा के साथ-साथ धर्म के प्रति लोगों का झुकाव और लगाओ भी बढ़ेगा..!

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