अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीय नागरिकों को ICE की हिरासत से रिहा करने का दिया आदेश

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वॉशिंगटन: अमेरिका के कैलिफोर्निया में अमेरिकी फेडरल अदालतों ने इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) को तीन भारतीय नागरिकों को हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि इन भारतीय नागरिकों को बिना उचित नोटिस और सुनवाई के दोबारा हिरासत में लिया गया, जो अमेरिकी संविधान के ‘ड्यू प्रोसेस क्लॉज’ का उल्लंघन है।

इस सप्ताह कैलिफोर्निया के पूर्वी और दक्षिणी जिलों में अलग-अलग मामलों में दिए गए फैसलों में फेडरल जजों ने कहा कि प्रवासी अधिकारियों ने दोबारा गिरफ्तारी से पहले बुनियादी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन तीनों भारतीय नागरिकों को पहले अमेरिका में रहने की अनुमति दी जा चुकी थी।

सख्त इमिग्रेशन नीति के बीच अहम फैसला

गौरतलब है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद इमिग्रेशन कानूनों को और सख्त किया गया है, जिसके तहत प्रवासियों की कड़ी जांच की जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में इन मामलों को अहम माना जा रहा है।

हरमीत एस. का मामला

कैलिफोर्निया के पूर्वी जिले के अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ट्रॉय एल. ननली ने 21 वर्षीय भारतीय नागरिक हरमीत एस. को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। हरमीत अगस्त 2022 में अमेरिका पहुंचे थे और नाबालिग होने के कारण उन्हें फेडरल चाइल्ड प्रोटेक्शन कानूनों के तहत पहले ही रिहा किया गया था। उनका इमिग्रेशन मामला अब भी लंबित है।

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, हरमीत ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के अल्टरनेटिव-टू-डिटेंशन प्रोग्राम की सभी शर्तों का पालन किया और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके बावजूद नवंबर 2025 में उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के ICE द्वारा हिरासत में लिया गया और एक महीने से अधिक समय तक बिना बॉन्ड हियरिंग के रखा गया। जज ननली ने इसे अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन के तहत ड्यू प्रोसेस क्लॉज का संभावित उल्लंघन माना।

कोर्ट ने ICE को हरमीत को दोबारा गिरफ्तार करने से रोका है और कहा है कि भविष्य में गिरफ्तारी के लिए पहले नोटिस या सुनवाई जरूरी होगी। साथ ही यह भी साबित करना होगा कि व्यक्ति समाज के लिए खतरा है या उसके फरार होने की आशंका है।

सावन के. को भी राहत

जज ननली ने दूसरे मामले में भारतीय नागरिक सावन के. को भी रिहा करने का आदेश दिया। सावन सितंबर 2024 में अमेरिका पहुंचे थे और भारत में राजनीतिक उत्पीड़न का हवाला देते हुए असाइलम के लिए आवेदन किया था, जो अभी लंबित है। सावन को पहले रिहा कर दिया गया था और वह नियमित रूप से ICE चेक-इन के लिए उपस्थित हो रहे थे।

इसके बावजूद सितंबर 2025 में एक रूटीन अपॉइंटमेंट के दौरान उन्हें फिर से हिरासत में लिया गया और करीब चार महीने तक बिना वारंट या सुनवाई के डिटेन रखा गया। कोर्ट ने इस कार्रवाई को प्रक्रियागत अधिकारों का उल्लंघन बताया।

तीसरे मामले में अमित को भी राहत

दक्षिणी कैलिफोर्निया में अमेरिकी जिला जज जेनिस एल. सैममार्टिनो ने इंपीरियल रीजनल डिटेंशन सेंटर में बंद भारतीय नागरिक अमित के मामले में हेबियस कॉर्पस की रिट जारी की। अमित सितंबर 2022 में अमेरिका आए थे और कुछ समय हिरासत में रहने के बाद कॉग्निजेंस ऑर्डर पर रिहा किए गए थे।

रिहाई के बाद अमित को नौकरी मिल गई थी और उन्होंने असाइलम के लिए आवेदन किया था। उनका भी कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। बावजूद इसके, सितंबर 2025 में उन्हें काम पर जाते समय उनके घर के बाहर से गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्हें राहत दी।

कोर्ट का सख्त रुख

इन सभी मामलों में अमेरिकी अदालतों ने साफ किया कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना संविधान के खिलाफ है। कोर्ट के इन फैसलों को अमेरिका में सख्त होती इमिग्रेशन नीति के बीच प्रवासियों के अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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Author: Deepak Mittal

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