जमीन विवाद में जान से मारने की धमकी, पीड़ित ने प्राथमिकी की मांग

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मृत विक्रेता स्व असीम राय
का भाई दीपांकर राय एवम् उसकी पत्नी चंचला द्वारा क़ब्ज़ा

शिप्रा सिकदार / पखांजूर / भूमि विवाद गहराने लगा है, सत्ता पक्ष का भाई दिखाते हुए आदिवासी परिवार को उसका हक नहीं दिया जा रहा है जिसे लेकर अब पीड़ित प्रार्थी आदिवासी परिवार ने न्यायालय का रास्ता अपनाते हुए पखांजूर पुलिस की शरण पहुंचकर आवेदन किया है, आदिवासी पीड़ित परिवार के राजेंद्र पटौती ने बताया कि उन्होंने शासन के नियमानुसार भूमि का भुगतान कर भूमि की रजिस्ट्री कर भूमि खरीदी की है परंतु भूमि स्वामी के निधन हो जाने के बाद आप उनके रिश्तेदार बड़े भाई बनकर भूमि पर काली निगाहें गड़ा लिए हैं और उनकी भूमि पर अवैध कब्जा कर कार्य कर रहे हैं जो पूरी तरह अनुचित है


यह मामला कांकेर जिले के पखांजूर ब्लॉक के एक गंभीर जमीन विवाद से जुड़ी है, जहां अनुसूचित जनजाति गोंड समुदाय के एक परिवार को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने पखांजूर पुलिस से इस विवाद में हस्तक्षेप करने की अपील की है,,

आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला,,,

हम आपको बताना चाहेंगे कि अगदलपुर हाटकचोरा के निवासी
राजेंद्र पटौती जिन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक जमीन पर खेती करने का अनुबंध किया था, अब गंभीर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। राजेंद्र पटौती ने बताया कि उनकी पत्नी श्रीमती शिता सिकदर के नाम से ग्राम पी.वी.-28 में खसरा क्रमांक 703 की जमीन है, जिसका अनुबंध वर्ष 2019 में किया गया था।
परंतु वर्तमान में, स्वर्गीय असीम राय की मृत्यु के बाद, उनकी पत्नी श्रीमती चंचला राय इस जमीन पर कब्जा कर चुकी हैं। अनुबंध के मुताबिक, अगर अनुबंध करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके उत्तराधिकारी को अनुबंध की शर्तों का पालन करना होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

राजेंद्र पटौती का कहना है कि 2 मई 2024 को उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी गई थी। यह धमकी स्व. असीम राय के भाई द्वारा दी गई, जिसने जमीन छोड़ने का दबाव बनाया। इसके बाद, 10 मई को उनके परिवार पर और भी ज्यादा दबाव डाला गया।

इसके बाद, 6 जुलाई 2024 को जब राजेंद्र पटौती अपने साले और एक मित्र के साथ जमीन पर खेती करने पहुंचे, तो उन्हें गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में श्रीमती चंचला राय और उनके बेटे दीपांकर राय की सीधी संलिप्तता है।

पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है और पुलिस से श्रीमती चंचला राय और दीपांकर राय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग कर रहा है।

इस विवाद को लेकर पीड़ित परिवार लगातार भय और असुरक्षा में जी रहा है। राजेंद्र पटौती का आरोप है कि धमकियों के कारण वह अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहे हैं, और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिससे उनका पूरा परिवार मानसिक दबाव में है।

घटना के बाद 10 जुलाई 2024 को जब राजेंद्र पटौती ने अपने साले निहार विश्वास को खेत जोताई के लिए भेजा, तो उसे भी जान से मारने की धमकी दी गई। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम में श्रीमती चंचला राय और उनके बेटे दीपांकर राय की मुख्य भूमिका है। राजेंद्र पटौती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।राजेंद्र पटौती ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने

की धमकी दी जा रही है और जमीन पर खेती करने से रोका जा रहा है। उन्होंने पुलिस से तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
मृत विक्रेता स्व असीम राय
का भाई दीपांकर राय एवम् उसकी पत्नी चंचला द्वारा क़ब्ज़ा किया गया है,

यह मामला सिर्फ जमीन विवाद का नहीं बल्कि एक परिवार की सुरक्षा और उनके अधिकारों का भी है। अगर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह विवाद और बढ़ सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।,
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री आदिवासी समुदाय से हैं छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासियों के पक्ष में शासन के नियमानुसार कार्य कर रहा है परंतु पखांजूर में आदिवासी परिवार के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उनकी भूमि पर बेजा कब्जा कर दबंगई दिखाई जा रही है,,00

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Author: Deepak Mittal

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