9वीं-10वीं में भी तीसरी भाषा होगी अनिवार्य, 2026-27 से लागू होगा नया नियम

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इससे पहले 29 जून को बोर्ड ने घोषणा की थी कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना जरूरी होगा।

क्या हैं नए नियम?

  • छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
  • इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी।
  • यदि कोई छात्र अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या अन्य विदेशी भाषा पढ़ता है, तो उसे इसके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।
  • भारतीय भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, उड़िया और असमिया सहित अन्य भारतीय भाषाएं शामिल हैं।

कक्षा 10वीं (सत्र 2026-27):
इस बैच के छात्रों पर नया नियम लागू नहीं होगा। वे पहले की तरह दो-भाषा प्रणाली के तहत ही पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा देंगे।

कक्षा 9वीं (सत्र 2026-27):
इन छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा से होगा। यदि कोई छात्र इसमें सफल नहीं होता, तो उसे 10वीं में प्रमोट किया जाएगा, लेकिन CBSE का पासिंग सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए 10वीं के दौरान यह परीक्षा पास करनी होगी। तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

कक्षा 7वीं और 8वीं (सत्र 2026-27):
जब ये छात्र 9वीं और 10वीं में पहुंचेंगे, तब भी तीन भाषाओं का अध्ययन जारी रहेगा। तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल की आंतरिक परीक्षा से होगा, बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

कक्षा 6वीं (सत्र 2026-27):
इन छात्रों को तीन में से दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। यह पहला बैच होगा, जिसे आगे चलकर 10वीं में तीसरी भाषा की CBSE बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

पहले क्या व्यवस्था थी?

अब तक अधिकांश छात्र 8वीं के बाद तीसरी भाषा छोड़ देते थे। लेकिन नए नियमों के तहत 2026-27 से 9वीं और 2027-28 से 10वीं तक तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य रहेगा। हालांकि, 2026-27 में 10वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले मौजूदा छात्रों पर इस बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

CBSE का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य भाषा सीखने को बोझ नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक समृद्ध और उपयोगी अनुभव बनाना है, जिससे भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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Author: Deepak Mittal

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