रायपुर। एक योग गुरु का कार्य केवल आसन और प्राणायाम का अभ्यास कराना भर नहीं होता, बल्कि उनका सबसे बड़ा दायित्व होता है अपने छात्रों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से संतुलित जीवन की ओर ले जाना।
योग गुरु का कर्तव्य है कि वे आत्मविश्वास के साथ छात्रों को सही मार्गदर्शन दें, उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाते हुए आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर करें।

इसके साथ ही, योग गुरु को एक सुरक्षित और सहयोगी समुदाय का निर्माण करना चाहिए, ताकि विद्यार्थी योग के माध्यम से खुद से जुड़ सकें और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सही राह चुन सकें।
सिर्फ आसन और प्राणायाम का अभ्यास कराना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्रों के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, चिंता और डर पर काबू पाने के लिए योग की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण देना भी गुरु का अहम दायित्व है।
एक सच्चा योग गुरु वही है जो अपने विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर उन्हें हल करने का हर संभव प्रयास करे।

योग गुरु रश्मि शुक्ला
संचालिका आस्था योगपीठ दुर्ग
Author: Deepak Mittal









