महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, कहा—महाकाल के सामने सब बराबर

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को स्पष्ट शब्दों में कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता और गर्भगृह में प्रवेश से जुड़े नियम तय करना मंदिर प्रशासन का अधिकार है, इसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “महाकाल के सामने सब बराबर हैं, किसी को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता। गर्भगृह में कौन प्रवेश करेगा, इसका फैसला मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन को ही करना है।” कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी मांग मंदिर प्रशासन के समक्ष रखें।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि बीते ढाई साल से आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश बंद है, जबकि इस दौरान वीआईपी और प्रभावशाली लोगों को नियमों को दरकिनार कर अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। उनका कहना था कि यह व्यवस्था संविधान के समानता के अधिकार, यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

इससे पहले अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच भी इसी तरह की याचिका को खारिज कर चुकी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश से संबंधित निर्णय उज्जैन के जिला कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रशासक के अधिकार क्षेत्र में आता है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

गौरतलब है कि कोरोना काल के बाद से महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के दर्शन बंद हैं। भक्तों को बाहरी क्षेत्र से ही भगवान महाकाल के दर्शन करने पड़ते हैं। हालांकि, समय-समय पर वीआईपी नेताओं और प्रभावशाली लोगों को विशेष अनुमति से गर्भगृह में प्रवेश दिए जाने की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे आम श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता को मंदिर प्रशासन से ही अपनी बात रखनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आंतरिक नियमों और प्रबंधन में न्यायालय का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। इस निर्णय से मंदिर प्रशासन पर नियमों को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लागू करने का दबाव बढ़ सकता है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

January 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Comment