सुप्रीम कोर्ट ने देश में लगातार बढ़ती कचरे की समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ठोस कचरा प्रबंधन केवल नगर निकायों या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति, परिवार, संस्था और प्रतिष्ठान कचरा पैदा करता है, इसलिए उसके उचित प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उसी की है।
अदालत ने कहा कि समाज में यह धारणा खत्म होनी चाहिए कि कचरा पैदा करना नागरिक का अधिकार है, लेकिन उसके दुष्प्रभाव को रोकना और कचरा प्रबंधन में सहयोग करना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कचरा पैदा करने वाला हर व्यक्ति उसके समाधान का भी हिस्सा बने।
जस्टिस एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारिया की पीठ ने 18 अगस्त को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि केवल समितियां और प्रवर्तन एजेंसियां गठित कर देने से कचरे की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए नागरिकों के व्यवहार में बदलाव जरूरी है।
बड़े कचरा उत्पादकों पर सख्ती करते हुए आदेश में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से जिला कलेक्टरों को अपने-अपने क्षेत्रों में सभी बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान करने का निर्देश देगी। यह प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।
Author: Deepak Mittal










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