
आरंगः इन दिनों अंचल के गांव-गांव में सुआ नृत्य की धूम मची है। दीपावली का पर्व पास आते ही बालिकाएं व महिलाएं घर-घर, गली-गली में समूह में पहुंचकर सुआ गीत के साथ नृत्य करती है।
जिसमें अनेक धार्मिक और सामाजिक संदेश परक गीत गाकर गोल घेरा में तालियों की थपोलियों बजाकर नृत्य करती है।
जिसमें कुछ बालिकाएं गीत गाती है जिसे शेष बालिकाएं दोहराती हुए नाचती है। वही सुआ नृत्य के पश्चात एक बालिकाएं सुआ के लिए अन्न धन मांगती है। अन्न धन मिलने पर आशीर्वाद स्वरुप आशीष देती है।
सुआ एक शाकाहारी पक्षी है जो हू बहू मनुष्य की आवाज निकाल सकती है। सुआ नृत्य समूह में किया जाता है जिसमें किसी भी प्रकार के वाद्ययंत्रों की आवश्यकता नहीं होती।
सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचा बसा है। दीपावली, तीजा, छेरछेरा, शरद पूर्णिमा पर सुआ नृत्य विशेष रूप से की जाती है, पर अब विभिन्न अवसरों पर सुआ नृत्य होने लगी है।
(संकलनकर्ता – रोशन चंद्राकर)
Author: Deepak Mittal









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