देहदान कर शीत चंद्राकर ने की दानशीलता की मिशाल पेश, इनकी आंखों से दो लोगों को मिलेगा दृष्टि

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Deepak Mittal

आरंग । पारागांव (आरंग) निवासी
67 वर्षीय शीत चंद्राकर का बुधवार को हृदयघात से आकस्मिक निधन हो गया। उनके देहावसान से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। वह एक सफल कृषक, प्रकृति प्रेमी ,समाजसेवी , दानशीलता के लिए भी जाने जाते रहे। उनके परिवार के सदस्य चंद्रहास चंद्राकर ने बताया कि पैतृक ग्राम छटेरा में तालाब के बीचों बीच बना भव्य शिव मंदिर की परिकल्पना शीत चंद्राकर ने ही किया था।

साथ ही मंदिर परिसर से संलग्न सामुदायिक भवन के लिए करीब पौन एकड़ जमीन भी दान किया था। जिसमें सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया है। आरंग में चंद्राकार समाज के भवन के लिए भी एक लाख 51 हजार रुपए दान कर उदारता व दानशीलता की मिसाल पेश किए हैं। उन्हें देहदान की प्रेरणा उनकी माता उखा बाई चंद्राकर से मिला ।उनकी माता उखाबाई ने भी देहदान किया था।


वह लंबे समय तक आप पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष, रायपुर, महासमुंद राज चंद्रनाहू चंद्राकार समाज के न्याय कामेटी के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी जिम्मेदारियां निभाते रहे। वह आधुनिक खेती को सदैव बढ़ावा देते रहे। उनके द्वारा जाम, पपीता,केला इत्यादि फलों की आधुनिक पद्धति से खेती कर किसानों को प्रोत्साहित करते रहे। साथ ही किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए निर्मित पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा निर्मित ‘खेती अपन सेती’ लघु फिल्म में उत्कृष्ट कृषक की भूमिका भी निभाए ।

उनके सरल, सहज व्यक्तित्व के कारण उनका सबसे मधुर संबंध रहा। उनके निधन पर नगर के अनेक संगठनों ने गहरा दुःख जाताया है। शोक सभा में किसान नेता पारसनाथ साहू ने कहा श्री चन्द्राकार का निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।देहदान की घोषणा के अनुरूप शीत चंद्राकर की पार्थिव काया को रिम्स कालेज को दिया गया है।

जहां नेत्रदान की प्रक्रिया भी की गई। उनके नेत्र से दो लोग दुनिया देख पाएंगे। ऐसे दानशील व्यक्ति मर कर भी अमर हैं। उनके अंतिम यात्रा में नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रशेखर चंद्राकर, चंद्राकार समाज के अध्यक्ष मनोज चंद्राकर, के के चंद्राकर, किसान नेता पारस साहू, अधिवक्ता गोपाल चंद्राकर, वतन चंद्राकर,समाजसेवी महेन्द्र कुमार पटेल सहित बड़ी संख्या में सर्व समाज के लोग उपस्थित होकर श्रद्धांजलि सभा में भाग लिए।


वे धर्म पत्नी सुधा चंद्राकर, एक पुत्री सनिष्ठा व पुत्र समीर चंद्राकर का भरा पूरा परिवार छोड़ गए।

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Author: Deepak Mittal

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