नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड पर उठे गंभीर सवाल — करोड़ों के फर्जी ई-वे बिल और जीएसटी घोटाले पर कंपनी की चुप्पी, निवेशकों में गहराई चिंता
रायपुर/राजनांदगांव
बलौदाबाजार-भाटापारा,,,सीमेंट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड पर करोड़ों रुपये के कथित फर्जी बिलिंग और जीएसटी अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कंपनी के शेयर होल्डर मिलिंद रमेश पिंगले ने कंपनी प्रबंधन को भेजे गए कई पत्रों में गंभीर सवाल उठाए हैं — जिनका अब तक कोई स्पष्ट और ठोस जवाब कंपनी द्वारा नहीं दिया गया है।
फर्जी ई-वे बिल और बिलिंग का आरोप
पत्रों के अनुसार, नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जी.एस.टी. नंबर: 22AAACL4159L1ZI) और नू- विस्टा लिमिटेड (जी.एस.टी. नंबर: 22AABCE7927L1ZI) के नाम पर करोड़ों रुपये के फर्जी बिल और ई-वे बिल जारी करने का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि कंपनी के नाम पर 2-व्हीलर, 3-व्हीलर, 4-व्हीलर (कार), एग्रीकल्चर ट्रैक्टर, स्कूल बस, ओपन ट्रक, चेन माउंटेन और टाटा एस जैसे हल्के वाहनों का उपयोग दर्शाकर बड़ी मात्रा में सीमेंट की सप्लाई दिखाते हुए ई-वे बिल जारी किए गए, जबकि वास्तविकता में परिवहन की कोई ठोस पुष्टि नहीं है।
निवेशकों का आरोप – कंपनी दे रही टालमटोल जवाब
निवेशक मिलिंद पिंगले ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि,
कंपनी द्वारा हमारे द्वारा भेजे गए पत्रों का कोई ठोस उत्तर नहीं दिया गया है। जवाब ना देकर कंपनी अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है और कुछ छुपाने का प्रयास कर रही है।”
उन्होंने आगे लिखा कि यदि कंपनी में कोई अनियमितता चल रही है तो उससे हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा, और जो अधिकारी या स्टाफ इस अनियमितता में शामिल हैं, उन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है।
जीएसटी विभाग की जांच अधूरी, कंपनी पर बढ़ा संदेह
सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी विभाग द्वारा इस पूरे प्रकरण की जांच एक वर्ष से अधिक समय से जारी है, किंतु अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इस वजह से निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
निवेशक पक्ष ने यह भी कहा है कि —“नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड की जांच में देरी से यह संदेह और गहराता जा रहा है कि कहीं कंपनी के भीतर ही कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा।”
कंपनी का जवाब — ‘हम कानून के अनुसार काम करते हैं’
कंपनी की ओर से भेजे गए जवाबी पत्र (दिनांक 08 सितंबर 2025) में कहा गया है कि हमारी कंपनी सभी वैधानिक नियमों और उच्च नैतिक मानकों का पालन करती है। मीडिया में चल रहे आरोप असंतुष्ट डीलरों के बीच विवाद का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाना है।”
कंपनी ने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी इसी तरह के आरोपों वाली एक याचिका को पहले ही खारिज कर दिया है।
निवेशकों में गहराई चिंता – ‘SEBI को लिखेंगे पत्र’
निवेशक मिलिंद पिंगले ने कहा है कि यदि कंपनी द्वारा जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की जाती तो वे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि,
कंपनी द्वारा यदि समय रहते पारदर्शिता नहीं दिखाई गई तो हजारों निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।”
सम्पूर्ण जांच की मांग हुई तेज,,
अब यह मामला केवल कंपनी की जवाबदेही का नहीं, बल्कि पूरे निवेशक समुदाय के विश्वास से जुड़ा विषय बन गया है। निवेशक समुदाय और शेयर होल्डर अब मांग कर रहे हैं कि जीएसटी विभाग, सेबी और कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय मिलकर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करें और सच्चाई सामने लाएं।
Author: Deepak Mittal










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