भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन 09 अगस्त को

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शहर में राखियों के बाजार सजे, तरह-तरह की रंग-बिरंगी राखियां लोगों को कर रही आकर्षित

निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111

मुंगेली :  भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व इस वर्ष 09 अगस्त को पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा।त्यौहार के आगमन से पहले ही राज्यभर में विशेष चहल-पहल देखने को मिल रही है। खासकर शहरों में राखियों के बाजार सजने लगे हैं, जहां तरह-तरह की रंग-बिरंगी राखियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं।


जिले के प्रमुख चौक पड़ाव चौक, माता परमेश्वरी चौक, सदर बाजार, गोल बाजार और स्थानीय हाट-बाजारों में अस्थायी स्टॉल लग चुके हैं। इन स्टॉलों पर राखियों की भरमार है पारंपरिक सूती राखी से लेकर डिजाइनर, कच्चे धागे से बनी, मोती-जड़ी, कार्टून कैरेक्टर राखी, फोटो राखी, ब्रेसलेट स्टाइल राखी, इको-फ्रेंडली राखी और डिजिटल राखियों तक हर तरह की राखी उपलब्ध है।

हर बजट के लिए राखी: 5 रुपये दर्जन से लेकर 300 रुपये तक

बाजार में विभिन्न मूल्य श्रेणियों में राखियों की बिक्री हो रही है, जिससे हर वर्ग के उपभोक्ता अपनी सामर्थ्यानुसार राखी खरीद सकते हैं। माता परमेश्वरी चौक में राखी बेच रहे व्यापारी गोलू देवांगन ने जानकारी देते हुए बताया कि “इस बार बाजार में राखी 5 रुपये दर्जन की दर से लेकर 300 रुपये तक बिक रही हैं।

बच्चों के लिए कार्टून और स्पाइडी राखी की मांग ज्यादा है, वहीं महिलाएं डिजाइनर और ब्रेसलेट राखियों की ओर आकर्षित हो रही हैं।” गोलू देवांगन के अनुसार, “इस साल राखियों की वैरायटी पहले से ज्यादा है। चीन से आने वाली राखियों पर रोक और लोगों के स्वदेशी राखियों की ओर बढ़ते रुझान के चलते छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में निर्मित राखियों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है। स्थानीय महिलाओं द्वारा बनाई गई हस्तनिर्मित राखियां भी काफी पसंद की जा रही हैं।”

महिलाओं को भी मिला रोजगार

रक्षाबंधन के इस पर्व में जहां भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का संदेश है, वहीं यह त्योहार कई महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह भी बना है। स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं द्वारा बनाई गई राखियां बाजार में बिक रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से सहयोग मिल रहा है और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी।

कोरोना के बाद बाजार में लौटी रौनक

पिछले कुछ वर्षों में कोरोना महामारी के कारण रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहारों पर भी असर पड़ा था। लेकिन इस बार बाजारों में फिर से वही पुरानी रौनक लौट आई है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार ग्राहक समय से पहले ही राखियों की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी बिक्री की उम्मीद है।

ऑनलाइन राखियों की भी डिमांड

हालांकि बाजार में भीड़ बढ़ रही है, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो ऑनलाइन माध्यम से राखियों की खरीदारी कर रहा है। कई युवा, खासकर जो बहनें दूसरे शहरों में हैं, वे ई-कॉमर्स साइट्स या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपने भाइयों के लिए राखियां भेज रही हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की डोर को मजबूत करने का अवसर है। बाजारों में राखियों की रौनक, रंग-बिरंगी राखियों की बहार और ग्राहकों की भीड़ यह दर्शाती है कि यह पर्व आज भी उतनी ही श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है जितना वर्षों पहले मनाया जाता था।

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Author: Deepak Mittal

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