नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए अभियान को देशव्यापी जन आंदोलन का रूप देने की घोषणा की। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों से आए MGNREGA मजदूर शामिल हुए।
ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने IANS से बातचीत में आरोप लगाया कि BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों, MGNREGA से जुड़े हितधारकों और मजदूरों से परामर्श किए बिना ग्रामीण रोजगार के अधिकार पर “तानाशाही हमला” किया है। उन्होंने दावा किया कि योजना को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया गया, मजदूरों से नौकरियां छीनी जा रही हैं और यहां तक कि कार्यक्रम से महात्मा गांधी का नाम भी हटाया गया है। लांबा ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने इसे हल्के में न लेने का फैसला किया है और इसे राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाएगा।
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने बताया कि कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे और सामाजिक संगठनों ने भी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। वहीं, कांग्रेस एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि पार्टी MGNREGA से जुड़े सभी सिविल सोसाइटी सदस्यों और श्रमिकों को एक साझा मंच पर लाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि यह एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन है। पार्टी गांव-गांव जाकर MGNREGA मजदूरों को जोड़ रही है और आज से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत हुई है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि COVID-19 के दौरान MGNREGA ने रोजगार देकर करोड़ों लोगों को संकट से उबरने में मदद की और यह योजना उस समय एक मजबूत सेफ्टी नेट साबित हुई।
कांग्रेस ने ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ को दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक कल्याण कार्यक्रम पर कथित हमलों के खिलाफ देशव्यापी अभियान के तौर पर औपचारिक रूप से शुरू किया है। पार्टी का आरोप है कि MGNREGA को कमजोर करने, उसका नाम बदलने या प्रस्तावित VB-GRAM-G एक्ट से बदलने की कोशिशें गरीब मजदूरों और महात्मा गांधी के आदर्शों पर सीधा हमला हैं। कांग्रेस के मुताबिक, 2005 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना ने दो दशकों में करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा का काम किया है। 2006 से अब तक इस योजना के तहत 180 करोड़ से अधिक पर्सन-डे रोजगार सृजित हुए हैं, जबकि महामारी के दौरान लगभग 4.6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिला।
आंदोलन के तहत कांग्रेस ने MGNREGA को तुरंत बहाल करने, काम के संवैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने, समय पर मजदूरी व जवाबदेही तय करने और पूरे देश में 400 रुपये न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग की है।
Author: Deepak Mittal










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