‘भारत को इतनी बड़ी सेना की जरूरत नहीं’, पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर सियासी हलचल

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कांग्रेस नेता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का हवाला देकर भविष्य के युद्धों को बताया हवाई और मिसाइल आधारित

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान ने राजनीतिक और सामरिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। चव्हाण ने कहा है कि भारत को अब इतनी बड़ी थल सेना की आवश्यकता नहीं है और सैनिकों को किसी अन्य उपयोगी कार्य में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी भविष्य के युद्धों के स्वरूप को लेकर की है।

मंगलवार (16 दिसंबर) को दिए बयान में पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सैनिकों की संख्या के मामले में भारत पाकिस्तान से कहीं आगे है। भारत के पास लगभग 12 से 15 लाख सैनिक हैं, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 5 से 6 लाख सैनिक हैं। इसके बावजूद उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा दौर में इतनी बड़ी पैदल सेना की वास्तव में जरूरत है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बदला युद्ध का स्वरूप

चव्हाण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इस ऑपरेशन ने साफ कर दिया है कि भविष्य के संघर्ष मुख्य रूप से हवाई ताकत और मिसाइलों के जरिए लड़े जाएंगे। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना का जमीनी मोर्चे पर योगदान बेहद सीमित रहा और सेना एक किलोमीटर भी आगे नहीं बढ़ी। पूरी कार्रवाई हवाई और मिसाइल हमलों तक ही सीमित थी।

पैदल सेना की भूमिका पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध की संभावनाएं अब कम होती जा रही हैं। आधुनिक युद्धों में तकनीक, मिसाइल सिस्टम और एयर पावर की भूमिका निर्णायक होती जा रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में सैनिक रखने की रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।

‘सैनिकों को अन्य उपयोगी कार्यों में लगाया जाए’

पृथ्वीराज चव्हाण ने सुझाव दिया कि 12 लाख से ज्यादा सैनिकों की विशाल सेना होने के बावजूद उनका उपयोग अब सीमित हो गया है। इसलिए उन्हें किसी अन्य उपयोगी कार्य में लगाया जाना चाहिए, ताकि देश के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

भविष्य की रणनीति पर जोर

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में युद्ध पूरी तरह से आधुनिक हथियारों और तकनीक पर निर्भर होंगे। देश को भविष्य के खतरों और चुनौतियों को देखते हुए अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करना चाहिए और परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नई परिस्थितियों के अनुसार तैयारी करनी चाहिए।

चव्हाण के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है, क्योंकि सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए ऐसे बयान अक्सर सियासी बहस का कारण बन जाते हैं।

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Author: Deepak Mittal

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