जे के मिश्र
, जिला ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स 24*7in बिलासपुर
कोरबा। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के इस उत्सव काल में जहां सरकार उपलब्धियों का जश्न मना रही है, वहीं बरपाली सब स्टेशन के अंतर्गत आने वाले तुमान फीडर से जुड़े 10 हजार से अधिक ग्रामीण उपभोक्ताओं की रातें अंधेरे और रतजगे में बीत रही हैं। खास बात यह है कि स्व. डॉ. बंशीलाल महतो जैसे पूर्व सांसद के गृह ग्राम सलिहाभांठा सहित दर्जनों गांव रोजाना रात 11:30 बजे के बाद बिजली कटौती की मार झेल रहे हैं।
एक सप्ताह से लगातार एक ही समय पर कटौती – महज संयोग या साज़िश?
ग्रामीणों का कहना है कि बीते सप्ताहभर से हर रात एक ही समय पर बिजली जाना, फिर देर रात लौटना, और यह सिलसिला कई बार दोहराना किसी तकनीकी गड़बड़ी से अधिक एक सुनियोजित खेल लगता है।
कौन हैं इन अंधेरों के सूत्रधार?
सवाल यह भी है कि इस योजनाबद्ध कटौती के पीछे आखिर किसका इशारा है? क्या यह जनता को सरकार से नाराज़ करने की कोशिश है? यदि ऐसा ही चलता रहा तो आगामी चुनावों में सत्ताधारी दल को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
प्रभावित गांवों की सूची
इस फीडर से जुड़े गांवों में शामिल हैं –
सलिहाभांठा, पकरिया, बंधवाभांठा, डोंगरीभांठा, सराईडीह, झींकाकुरिहा, संडैल, भैंसामुड़ा, मुड़ा, कटबितला सहित अन्य गांव। इन सभी क्षेत्रों के उपभोक्ता नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें रात की नींद और चैन दोनों गंवाना पड़ रहा है।
गर्मी में उमस और सर्पदंश का खतरा
रात के अंधेरे में गर्मी और उमस के अलावा सर्पदंश जैसे खतरों से भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है। बिजली कटौती सिर्फ असुविधा नहीं, अब यह जीवन सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है।
कर्मचारियों की लापरवाही, फोन उठाने से भी परहेज
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाईट ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी जवाब तक नहीं देते, न ही तकनीकी खराबी की स्थिति में किसी को भेजा जाता है। नवपदस्थ जेई सलोनी टोप्पो से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।










Author: Deepak Mittal
