करूर, तमिलनाडु: तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को हुई राजनीतिक रैली में भगदड़ ने शहर को हिला दिया। इस हादसे में 41 लोगों की मौत और लगभग 60 लोग घायल हुए। घटना के बाद एनडीए का 8 सदस्यीय डेलीगेशन प्रभावित परिवारों से मिलने करूर पहुंचा।
डेलीगेशन को वहां मौजूद लोगों ने अपनी आंखों देखा हाल बताया। एक आई-विटनेस ने कहा कि टीवीके नेता और अभिनेता विजय के भाषण शुरू होने के 3-4 मिनट के भीतर ही लोग बेहोश होने लगे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने बताया कि विजय ने हंगामा शुरू होने के बाद मात्र 10 मिनट तक भाषण दिया और फिर वहां से चले गए।
घटना के दौरान की स्थिति:
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स्थानीय प्रशासन नाकाम रहा।
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सड़क सिर्फ 19 फीट चौड़ी थी, जबकि गाड़ी 12 फीट चौड़ी होने की वजह से आधी सड़क को ही कवर कर रही थी।
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भीड़ में कई लोग स्थानीय नहीं थे, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई।
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एम्बुलेंस के आने से भीड़ में और उथल-पुथल मची।
बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने इसे राजनीति के इतिहास की सबसे बड़ी और भयानक भगदड़ बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे हादसों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी और यह देखना चाहिए कि इतने लोकप्रिय नेता इतने बड़े जमावड़े को नियंत्रित कर सकें।
इस बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भगदड़ में घायल और मृतकों के परिवार वालों से मुलाकात की। उन्होंने मृतक परिवारों को 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
सवाल अब यही उठता है कि इतनी बड़ी भीड़ के बीच सुरक्षा इंतजाम क्यों फेल हुए और ऐसी त्रासदी से कैसे बचा जा सकता था।
Author: Deepak Mittal









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