इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर थोपा था भारत पर आपातकाल-चंदूलाल साहू

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आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण:पूर्व सांसद ने पत्रकारवार्ता में कांग्रेस पे साधा निशाना

निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111

मुंगेली- कांग्रेस ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को रौंदा बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक
अधिकारों को कुचलकर यह स्पष्ट कर दिया कि जब-जब उनकी सत्ता संकट में होती है, वे संविधान और देश
की आत्मा को ताक पर रखने से पीछे नहीं हटते। ये बातें आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित पत्रकारवार्ता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए महासमुंद के पूर्व सांसद एवं छग राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू ने कही।

विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद श्री साहू ने बताया कि 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने‘आंतरिक अशांति ’ का बहाना बनाकर भारत पर आपातकाल थोप दिया। यह निर्णय किसी युद्ध या विद्रोह के कारण नहीं, बल्कि अपने चुनाव को रद्द किए जाने और सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया था।

कांग्रेस पार्टी ने इस काले अध्याय में न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को रौंदा, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलकर यह स्पष्ट कर दिया कि जब-जब उनकी सत्ता संकट में होती है,वे संविधान और देश की आत्मा को ताक पर रखने से पीछे नहीं हटते। आज 50 वर्ष बाद भी कांग्रेस उसी मानसिकता के साथ चल रही है, आज भी सिर्फ तरीकों का बदलाव हुआ है, नीयत आज भी वैसी ही तानाशाही वाली ही है।


मार्च 1971 में लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बावजूद इंदिरा गांधी की वैधानिकता को चुनौती मिली। उनके विपक्षी उम्मीदवार राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनाव को भ्रष्ट आचरण और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आधार पर चुनौती दी। देेश की अर्थव्यवस्था मंंदी केे दौर सेे गुुजर रही थी, जिससेे जनता में असंंतोष बढ़ता जा रहा था। देश पहले से ही आर्थिक बदहाली, महंगाई और खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था।

बिहार और गुजरात में छात्रों के नेतृत्व में नवनिर्माण आंदोलन खड़ा हो चुका था। 8 मई 1974 को जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में ऐतिहासिक केरल हड़ताल ने पूरे देश को जकड़ लिया। इस आंदोलन को रोकने के लिए 1974 में गुजरात में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया। यही राष्ट्रपति शासन 1975 में लगने वाले आपातकाल की एक शुरुआत थी।


इसके साथ ही बिहार में कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा और 1975 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। 12 जून 1975 को कोर्ट ने इंदिरा गांधी को चुनाव में दोषी ठहराया और उन्हें 6 वर्षों तक किसी भी निर्वाचित पद पर रहने से अयोग्य करार दिया। इसके बाद राजनीतिक अस्थिरता तेजी से बढ़ी, जिससे घबराकर इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को ‘आंतरिक अशांति ’ का हवाला देकर राष्ट्रपति को आधी रात जगा कर हस्ताक्षर कराया और देश मे आपातकाल लगा दिया।

रातोंरात प्रेस की बिजली काटी गई, नेताओं को बंदी बनाया गया था मुंगेली के द्वारिका जायसवाल सहित कई लोग जेल में डाल दिए गए थे। पत्रकारों ने पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की बात कही। प्रेसवार्ता में छग शासन रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक,जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय,लोकतंत्र सेनानी द्वारिका जायसवाल, जिला भाजपा अध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी, जिला मीडिया प्रभारी सुनील पाठक, मिट्ठूलाल यादव,कोटूमल दादवानी,सौरभ बाजपेयी, राजीव श्रीवास आदि उपस्थित रहे।

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Author: Deepak Mittal

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