नई दिल्ली: स्विट्जरलैंड के प्रतिष्ठित मिलिट्री थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्ट्री एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज’ (CHPM) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर 47 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 7 से 10 मई 2025 तक चले 88 घंटे के सैन्य संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान पर निर्णायक बढ़त हासिल की और उसकी जवाबी सैन्य क्षमता को लगभग निष्प्रभावी कर दिया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन की शुरुआत 7 मई की रात हुई, जब भारतीय वायुसेना के राफेल और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने सीमा पार कर पाकिस्तान के भीतर बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों पर सटीक हवाई हमले किए। इन हमलों से आतंकी संगठनों के ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
स्विस थिंक टैंक के अनुसार, पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में 30 से अधिक लड़ाकू विमान, पीएल-15 मिसाइलें और 900 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल किए। ड्रोन की दो बड़ी लहरों का उद्देश्य भारतीय रडार सिस्टम को सक्रिय कर उनकी लोकेशन का पता लगाना था, लेकिन भारत के अत्याधुनिक ‘आकाशतीर’ नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इस रणनीति को पूरी तरह नाकाम कर दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधे से ज्यादा ड्रोन साधारण एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ही मार गिराए गए और पाकिस्तान भारत की किसी भी अहम सैन्य संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा सका।
10 मई की तड़के 2 से 5 बजे के बीच भारत ने अपनी सीमा के भीतर से ही ब्रह्मोस और स्कैल्प-ईजी (SCALP-EG) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से पाकिस्तान के एयरबेस, रडार स्टेशन और कमांड सेंटर्स पर जोरदार हमला किया। इन हमलों में पाकिस्तानी वायुसेना के कई लड़ाकू विमान नष्ट हो गए, रनवे क्षतिग्रस्त हो गए और कमांड सिस्टम ठप पड़ गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस निर्णायक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अपनी जवाबी सैन्य क्षमता खो बैठा और 10 मई की दोपहर तक इस्लामाबाद को युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया।
यह रिपोर्ट मिलिट्री इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलाज़ द्वारा तैयार की गई है, जिसकी समीक्षा स्विस वायुसेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल समेत विशेषज्ञों के एक पैनल ने की। निष्कर्ष में कहा गया है कि भारत ने अपने राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल किया। न केवल आतंकी ढांचे को दंडित किया गया, बल्कि पाकिस्तान की हवाई जवाबी क्षमता को भी शून्य कर दिया गया, जिससे यह संघर्ष लंबा खिंचने के बजाय सीमित समय में समाप्त हो गया।
Author: Deepak Mittal










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