प्रदेश की जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या, ओवरक्राउडिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि नई जेलों के निर्माण में मॉडल जेल मैनुअल 2016 के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को तय की गई है।
यह मामला बिलासपुर निवासी शिवराज सिंह द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया, जिसमें जेलों में ओवरक्राउडिंग, कैदियों के स्वास्थ्य और अन्य अव्यवस्थाओं को उठाया गया था। हाईकोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए इस पर सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जेल विभाग के डीजी ने शपथपत्र प्रस्तुत कर जानकारी दी कि बिलासपुर के बैमा नगई में नई जेल का निर्माण तेजी से जारी है।
लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्माण मॉडल जेल मैनुअल 2016 के मानकों से भी बेहतर स्तर पर किया जा रहा है।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया है, जो लगातार निगरानी कर रही है।
Author: Deepak Mittal









