नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत आखिरकार पूरी हो गई है। करीब दो दशकों के प्रयासों के बाद हुए इस समझौते को दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक करार दिया है। यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मई 2021 में दोबारा शुरू हुई ट्रेड वार्ताओं को अब सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
एंटोनियो कोस्टा ने कहा, “यह शिखर सम्मेलन दुनिया को स्पष्ट संदेश देता है कि वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर में भारत और यूरोपीय संघ रणनीतिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में साथ खड़े हैं।” उन्होंने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते भारत और EU मिलकर शांति, स्थिरता, आर्थिक विकास और सतत विकास को मजबूती देने के लिए काम करेंगे।
यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष ने अपनी भारतीय जड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह एक ओवरसीज भारतीय नागरिक हैं और गोवा से उनके पारिवारिक संबंध रहे हैं। कोस्टा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने इस समझौते को व्यापार, सुरक्षा और पीपल-टू-पीपल टाइज के लिहाज से एक नया अध्याय बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-EU FTA को भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता बताया। पीएम मोदी ने कहा, “27 जनवरी को भारत ने 27 यूरोपीय देशों के साथ यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया है। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का एक ब्लूप्रिंट है।” उन्होंने कहा कि इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, इनोवेशन पार्टनरशिप मजबूत होंगी और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस समझौते के तहत भारत और EU मिलकर IMEA कॉरिडोर को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही मैरीटाइम सिक्योरिटी, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। पीएम मोदी ने वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में रिफॉर्म बेहद जरूरी हैं।
इस ऐतिहासिक डील के बाद अमेरिका की नाराजगी भी खुलकर सामने आई है। भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यूरोपीय देश खुद के खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहे हैं।” उल्लेखनीय है कि इससे पहले अमेरिका रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर “पुतिन की वॉर मशीन” को फंड करने जैसे आरोप लगाता रहा है।
कुल मिलाकर, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह FTA न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन पर भी इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है।
Author: Deepak Mittal










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