मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में लीला साहू के गांव की सड़क का मुद्दा अभी सुलझा ही नहीं था कि एक और दिल दहलाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक गर्भवती महिला की जान चली गई. मृतक महिला वायरल वुमन लीला साहू के ही विंध्य क्षेत्र की रहने वाली थी.
दरअसल, रीवा जिले में एक दुखद घटना घटी, जहां एक गर्भवती महिला लगभग दो घंटे तक सड़कों पर पानी भरने और चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण फंसी रही. प्रिया कोल नाम की इस महिला की मृत्यु तब हुई, जब नदी का जलस्तर बढ़ने से नजदीकी अस्पताल जाने के सभी रास्ते बंद हो गए.
यह घटना रीवा के जवा ब्लॉक के अंतर्गत भटिगवां गांव में हुई. प्रिया अपनी गर्भावस्था के आखिरी महीनों में भटिगवां स्थित अपने मायके में रह रही थी. उसका ससुराल, बरहटा गांव, खराब सड़क संपर्क से बुरी तरह प्रभावित है. बरहटा में स्वास्थ्य सेवा और परिवहन की कमी के कारण होने वाली जटिलताओं के डर से, उसने सुरक्षित प्रसव के लिए अपने माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया था.
हालांकि, रविवार की रात प्रिया की हालत अचानक बिगड़ गई. उसके परिवार ने आपात स्थिति को भांपते हुए उसे जवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की कोशिश की. लेकिन उनका रास्ता उफनती महाना नदी के कारण अवरुद्ध हो गया, जिसमें एक प्रमुख पुल डूब गया था. पानी का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ने के कारण, उनके पास नदी पार करने का कोई रास्ता नहीं था.
लगभग दो घंटे तक परिवार नदी के किनारे असहाय होकर इंतजार करता रहा और प्रिया दर्द से तड़पती रही. वे गांव से एक स्थानीय डॉक्टर को बुलाने में कामयाब रहे, जिन्होंने आने पर केवल यही पुष्टि की कि प्रिया की मृत्यु हो चुकी थी.
त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई. महिला के शव को 40 किलोमीटर का चक्कर लगाकर उसके ससुराल ले जाना पड़ा, क्योंकि सड़कें उसी खराब स्थिति में थीं, जिसके कारण उसे अपने मायके में शरण लेनी पड़ी थी. सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया. घटना के बाद, परिवार ने कड़ी आपत्ति जताई और जवाबदेही की मांग की है.
रीवा की जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. प्रिया के ससुर ने बताया, “हमारे गांव में सड़कें ठीक नहीं हैं. इसलिए वह प्रसव के लिए अपने मायके आई थी, इस उम्मीद में कि वहां वह सुरक्षित रहेगी. लेकिन सड़कों की कमी ने उसकी जान ले ली.”
हाल ही में, सीधी जिले के खड्डी खुर्द गांव की नौ महीने की गर्भवती लीला साहू ने एक वायरल वीडियो पोस्ट करके अधिकारियों से अपने गांव तक मोटर वाहन योग्य सड़क बनाने की गुहार लगाई थी. उनका गांव भी उसी विंध्य क्षेत्र में आता है, जहां खराब बुनियादी ढांचा लोगों की जान जोखिम में डालता रहता है. घुटनों तक कीचड़ में डूबीं, उन्होंने सवाल किया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा 2023 तक बार-बार वादे करने के बावजूद सड़क क्यों नहीं बनाई गई.
जब सीधी से बीजेपी सांसद राजेश मिश्रा से लीला साहू के गांव की खराब सड़कों से जुड़े वायरल वीडियो के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “इसमें चिंता की क्या बात है? हमारे पास एम्बुलेंस हैं, अस्पताल हैं, आशा कार्यकर्ता हैं. हम व्यवस्था कर देंगे. हर डिलीवरी की एक अपेक्षित तिथि होती है, हमें बताएं, और हम उसे एक सप्ताह पहले ही ले जाएंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “इन बातों को सार्वजनिक रूप से उठाना आदर्श नहीं है, ये बातें सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए की जाती हैं.”
बीजेपी सांसद मिश्रा ने जिम्मेदारी पिछले जनप्रतिनिधियों पर डाल दी और कांग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया. जनता के आक्रोश के बाद, मिश्रा ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने कहा कि उनका मतलब केवल इतना था कि एम्बुलेंस और आशा कार्यकर्ताओं जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं और जटिलताओं से बचने के लिए गर्भवती माताओं को पहले से अस्पताल ले जाया जा सकता है.
कांग्रेस पार्टी ने भी इस घटना पर तीखे सवाल उठाए हैं और सीधे राज्य सरकार पर निशाना साधा है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने लिखा, “जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था चरमरा रही है, तो मध्य प्रदेश के बाकी हिस्सों के लिए क्या उम्मीद है?”
उन्होंने आगे कहा, “उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह निर्वाचन क्षेत्र में बाढ़ के पानी से घिरे भटिगवां गांव में एक गर्भवती महिला की इलाज के अभाव में मृत्यु हो गई. वह दर्द से तड़पती रही, लेकिन अस्पताल नहीं पहुंच सकी और न ही कोई मदद पहुंची.”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “अगर एक मंत्री के गृह क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा की यह स्थिति है, तो राज्य के बाकी दूरदराज के इलाकों की स्थिति की केवल कल्पना ही की जा सकती है.”
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8155235
Total views : 8175510