ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। पिछले 18 दिनों में 6 हिंदू नागरिकों की नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सोमवार (5 जनवरी 2026) की रात महज कुछ घंटों के अंतराल में नरसिंग्दी और जेसोर में दो अलग-अलग वारदातों ने दहशत फैला दी। हमलावरों ने एक किराना दुकानदार और एक अखबार के संपादक को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
किराना दुकान में घुसकर किया हमला, शरत चक्रवर्ती की दर्दनाक मौत
नरसिंग्दी जिले के चरसिंदूर बाजार में 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि अपनी छोटी सी किराने की दुकान चला रहे थे। सोमवार रात अचानक अज्ञात हमलावर दुकान में घुसे और उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर दिए। खून से लथपथ शरत को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
इस हत्या को और भी डरावना बनाता है एक सोशल मीडिया पोस्ट। महज 19 दिसंबर को शरत ने फेसबुक पर लिखा था कि उनकी जन्मभूमि अब ‘मौत की घाटी’ बन चुकी है। कुछ ही दिनों बाद उनकी वही आशंका सच साबित हो गई।
जेसोर में संपादक की सरेआम हत्या, सिर में मारी गोली
दूसरी दिल दहला देने वाली वारदात जेसोर के मोनीरामपुर इलाके में हुई। यहां ‘दैनिक बीडी खबर’ के कार्यकारी संपादक और बर्फ फैक्ट्री मालिक राणा प्रताप बैरागी को निशाना बनाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मोटरसाइकिल पर आए तीन हमलावरों ने उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाया और पास की एक गली में ले जाकर सिर में बेहद करीब से गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। एक पत्रकार की इस तरह सरेआम हत्या ने इलाके में डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।
न्यू ईयर पर जिंदा जलाया गया खोकन दास
हिंसा की इस खौफनाक कड़ी में सबसे रूह कंपा देने वाला मामला खोकन दास का है। नए साल की पूर्व संध्या पर हमलावरों ने उन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। जान बचाने के लिए वह पास के तालाब में कूद गए, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
18 दिनों में 6 हत्याएं, ‘वैली ऑफ डेथ’ बनता बांग्लादेश
शरत, राणा प्रताप और खोकन जैसे आम हिंदू नागरिकों की टारगेट किलिंग यह साफ इशारा कर रही है कि अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि पुलिस ने जांच की बात कही है, लेकिन अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी या ठोस कार्रवाई की खबर सामने नहीं आई है।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई और दोषियों को सजा न मिलना हमलावरों के हौसले बढ़ा रहा है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जता रहा है।
Author: Deepak Mittal








