Gas Supply Decline: भारत में गैस की खपत क्यों घटी?

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नई दिल्ली: देश में ऊर्जा खपत को लेकर एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत में प्राकृतिक गैस की औसत खपत घटकर करीब 190 एमएमएससीएमडी रह गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 200 एमएमएससीएमडी के मुकाबले 4.6% कम है।
यह गिरावट अचानक नहीं, बल्कि कई बड़े आर्थिक और मौसमी कारणों का नतीजा मानी जा रही है।

 बिजली सेक्टर से घट गई गैस की मांग

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मियों में गैस खपत में तेज गिरावट देखी गई। इसकी सबसे बड़ी वजह रही—

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून का जल्दी आना,

  • कूलिंग की मांग में कमी,

  • और गैस-आधारित बिजली संयंत्रों का कम उपयोग।

पिछले साल इसी अवधि में हालात बिल्कुल उलट थे, जब नीतिगत हस्तक्षेप के चलते गैस पावर प्लांट्स का डिस्पैच बढ़ा और खपत 203 एमएमएससीएमडी तक पहुंच गई थी।

 महंगी LNG ने बढ़ाई मुश्किल

इस दौरान स्पॉट LNG की औसत कीमत करीब 13 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रही, जो साल-दर-साल आधार पर 34% ज्यादा है।
महंगी गैस के कारण गैस-आधारित बिजली उत्पादन मेरिट ऑर्डर से बाहर हो गया और बिजली कंपनियों ने गैस की जगह दूसरे विकल्प चुने, जिससे मांग और दबाव में आ गई।

 मानसून में थोड़ी राहत, लेकिन पूरी रिकवरी नहीं

मानसून के दौरान हालात कुछ संभले।

  • LNG कीमतों में करीब 9% की गिरावट,

  • रिफाइनरी और उर्वरक इकाइयों के दोबारा शुरू होने से
    गैस खपत 1.2% बढ़कर लगभग 191 एमएमएससीएमडी पहुंच गई।

हालांकि, बिजली सेक्टर से मांग कमजोर ही बनी रही, जिससे कुल रिकवरी सीमित रही।

 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन बना सबसे बड़ा सहारा

जहां कुल गैस डिमांड दबाव में रही, वहीं सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सेक्टर ने राहत दी।

  • CGD की खपत 8.8% बढ़कर 44 एमएमएससीएमडी हो गई।

  • कुल गैस डिमांड में CGD की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 23% पहुंच गई।

इसके पीछे देशभर में तेजी से फैलता गैस इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ा कारण रहा।

 CNG–PNG नेटवर्क का तेज विस्तार

अक्टूबर तक देश में—

  • 8,477 CNG स्टेशन,

  • 1.59 करोड़ घरेलू PNG कनेक्शन हो चुके हैं।

केवल इसी वित्त वर्ष में

  • 361 नए CNG स्टेशन,

  • और 9 लाख नए घरेलू कनेक्शन जोड़े गए, जिससे ट्रांसपोर्ट और घरेलू मांग को स्थायी सहारा मिला।

 सप्लाई साइड में बड़ा बदलाव

CGD सेक्टर को मिलने वाली APM गैस की हिस्सेदारी अब घटकर 35–40% रह गई है, जो पहले 55–65% थी।
अब सेक्टर को

  • नई कुएं की गैस,

  • HPHT गैस

  • और R-LNG पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।

इससे आयात पर निर्भरता 32% से बढ़कर 36% हो गई है, हालांकि संतुलित कीमतों के कारण मांग पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

 पाइपलाइन टैरिफ सुधार से उम्मीद

PNGRB का नया दो-जोन पाइपलाइन टैरिफ फ्रेमवर्क, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा,
दूर-दराज के इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट 50% तक घटा सकता है
इससे गैस सस्ती होगी और CGD नेटवर्क के विस्तार को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

 आगे क्या?

विशेषज्ञों के मुताबिक,

  • कुल गैस मांग फिलहाल रेंजबाउंड रह सकती है,

  • लेकिन CGD सेक्टर स्थिरता की रीढ़ बना रहेगा।

नीतिगत समर्थन, बेहतर कीमत संकेत और नेटवर्क विस्तार मिलकर आने वाले समय में भारत की गैस डिमांड में धीरे-धीरे मजबूत वापसी की नींव रख सकते हैं।

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Author: Deepak Mittal

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