मिडिल एज में छोटी-छोटी चीजें भूलना बड़े खतरे की चेतावनी

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दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-मोटी चीजें भूल जाना आम बात है, लेकिन अगर यह समस्या रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करने लगे या फिर अपनों के चेहरे, नाम या घर का रास्ता भूलने जैसी स्थिति बनने लगे, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह समस्या गंभीर मस्तिष्क रोग Alzheimer’s disease की शुरुआती चेतावनी भी हो सकती है।

दरअसल, अल्जाइमर केवल बढ़ती उम्र का असर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को कमजोर कर देती है। आमतौर पर लोग इसे सामान्य भूलने की आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके शुरुआती संकेत कई साल पहले ही दिखाई देने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए और जीवनशैली में बदलाव किया जाए, तो बीमारी की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।

अल्जाइमर का संबंध सीधे दिमाग के कामकाज से होता है। दिमाग हमारे शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करता है, इसलिए इसकी सेहत बेहद जरूरी है। आजकल कम उम्र के लोग भी भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके पीछे हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, तनाव, खराब खानपान और नींद की कमी जैसे कारण जिम्मेदार माने जाते हैं। हाल ही में फरवरी में Washington University in St. Louis की एक रिसर्च में यह सामने आया कि एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण तीन से चार साल पहले ही पता लगाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक अल्जाइमर के शुरुआती संकेतों में रोजमर्रा की चीजें भूल जाना, परिचित लोगों के नाम याद न रहना, अचानक कोई काम याद न आना और दिनचर्या को लेकर भ्रम होना शामिल है। बढ़ती उम्र में हल्की भूलने की समस्या सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि यह मिडिल एज में शुरू हो जाए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि सही खानपान और जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डाइट में हरी सब्जियां, बेरी, ड्राई फ्रूट्स, साबुत अनाज और ऑलिव ऑयल शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। इसके साथ ही नियमित व्यायाम, वॉकिंग या एरोबिक गतिविधियां दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ाती हैं और न्यूरॉन्स को मजबूत बनाती हैं।

इसके अलावा दिमाग को सक्रिय रखना भी बेहद जरूरी है। पजल्स हल करना, पढ़ाई करना, नई चीजें सीखना और म्यूजिक सुनना दिमाग के कनेक्शन को मजबूत करता है। शोध के अनुसार म्यूजिक सुनने से डिमेंशिया का खतरा करीब 39 प्रतिशत तक कम हो सकता है। परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत तथा सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि अकेलापन इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार दिल और दिमाग की सेहत का गहरा संबंध है। इसलिए ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को नियंत्रित रखना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम करना अल्जाइमर से बचाव के लिए बेहद जरूरी है।

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Author: Deepak Mittal

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