दुर्ग: भिलाई स्थित स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। पीएचडी शोधार्थियों द्वारा जमा की गई लाखों रुपये की फीस के गबन का खुलासा होने से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी रसीदों के जरिए शोधार्थियों से फीस वसूली गई, लेकिन यह राशि विश्वविद्यालय के खाते में जमा ही नहीं की गई।
मिली जानकारी के अनुसार, यह अनियमितता वर्ष 2022 से 2025 के बीच की बताई जा रही है। जांच के दौरान सामने आया कि शोधार्थियों ने विधिवत फीस का भुगतान किया था और बदले में उन्हें विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रतीत होने वाली रसीदें भी दी गई थीं, लेकिन जब इन रसीदों का मिलान विश्वविद्यालय के बैंक खातों और रजिस्टरों से किया गया तो राशि जमा न होने का खुलासा हुआ। फर्जी रसीदों के माध्यम से फीस की रकम बीच में ही गायब कर दी गई।
घोटाले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन किया है, जिसे एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए विश्वविद्यालय ने नोटिस जारी कर सभी प्रकार की फीस केवल ऑनलाइन या यूपीआई के माध्यम से जमा करने के आदेश दिए हैं।
इस घोटाले के कारण कई शोधार्थियों की पढ़ाई और प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। जिन शोधार्थियों ने समय पर फीस जमा की थी, उनके पास वैध रसीदें मौजूद हैं, लेकिन उनके आगे के अकादमिक प्रोसेस को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। वहीं कुछ शोधार्थियों के अवॉर्ड जारी हो चुके हैं, जबकि कुछ ने लंबी देरी के चलते दोबारा फीस जमा कर दी थी।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
Author: Deepak Mittal










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