कोलकाता: चुनाव आयोग (ECI) पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान चुनावी अधिकारियों द्वारा बिना सूचीबद्ध पहचान-पत्र स्वीकार किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। आयोग उन इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (AEROs) से स्पष्टीकरण मांगने पर विचार कर रहा है, जिन्होंने आयोग के स्पष्ट निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए 13 मान्यता प्राप्त दस्तावेजों के अलावा अन्य पहचान-पत्रों को भी स्वीकार कर लिया।
ECI ने पहले ही 13 प्रकार के दस्तावेजों की सूची जारी की थी, जिन्हें ही पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाना है। इसके साथ ही आयोग ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DMs) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल अधिकारियों (DEOs) को निर्देश दिए थे कि वे इस निर्देश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
सूत्रों ने बताया कि इसके बावजूद कई स्थानों पर ऐसे दस्तावेज स्वीकार किए गए हैं, जिससे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया में देरी हो रही है। जिन मतदाताओं ने गैर-लिस्टेड दस्तावेज जमा किए हैं, उन्हें पुनः बुलाकर मान्यता प्राप्त दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जाएगा। वहीं, कुछ लोग इस स्थिति का दुरुपयोग कर वोटरों को परेशान करने का आरोप भी लगा रहे हैं।
चुनाव आयोग ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई 7 फरवरी तक जारी रखेगा। अंतिम वोटर लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित होगी। आयोग ने 6,500 केंद्रों पर प्रतिदिन 7,00,000 सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा है ताकि समय पर सूची जारी की जा सके। अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद आयोग की पूरी बेंच पश्चिम बंगाल का दौरा करेगी और विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा।
Author: Deepak Mittal










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