कांकेर: कांकेर जिले के हल्बा चौकी अंतर्गत ग्राम देवीनवागांव में हुए हत्याकांड के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। 18 जनवरी 2026 को मोहरगंज शोरी की हत्या के बाद सबूत छिपाने के उद्देश्य से उसका शव गंगरेल बांध के गहरे डुबान में फेंक दिया गया था। पुलिस और स्थानीय मछुआरों के संयुक्त प्रयास से पांच दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद शव बरामद कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, मोहरगंज शोरी की हत्या चार आरोपियों और चार नाबालिगों ने मिलकर की थी। आरोपियों ने गाली-गलौज के बाद हाथ-मुक्कों और लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई कर उसकी जान ले ली। इसके बाद शव को पत्थर बांधकर गंगरेल बांध के गहरे पानी में फेंक दिया गया, ताकि घटना का खुलासा न हो सके।
शव की तलाश में ग्राम देवीनवागांव, बारगरी, कोसमी, मुस्केरा और बिरनपुर के करीब 40 मछुआरों ने पुलिस का विशेष सहयोग किया। मछुआरों ने लगातार पांच दिनों तक गंगरेल बांध के डुबान क्षेत्र में खोजबीन की, जिसके बाद आखिरकार शव बरामद किया जा सका। मछुआरों के इस सराहनीय योगदान को पुलिस ने उच्च स्तर पर सराहा।
पुलिस अधीक्षक कांकेर निखिल अशोक कुमार राखेचा के निर्देश पर चौकी हल्बा प्रभारी कोमल भूषण पटेल ने 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन 40 मछुआरों को सम्मानित किया। उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट कर उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। पुलिस ने इस पहल को समाज और प्रशासन के बीच सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया।
पुलिस ने बताया कि हत्याकांड के मुख्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है। वहीं, नाबालिग आरोपियों के खिलाफ बाल संरक्षण एवं किशोर न्याय अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपराधिक घटना या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मछुआरों का सम्मान यह संदेश देता है कि समाज और पुलिस के आपसी सहयोग से अपराधियों पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई संभव है।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8148192
Total views : 8164241