दल्लीराजहरा : बुधवार का दिन दल्लीराजहरा के लिए इतिहास के रूप में जाना जाएगा आज का दिन शहीद परिवार के लिए विभिन्न श्रमिक संगठनों के अलावा सत्ता पक्ष विपक्ष और राजनीतिक दलों के लोगों ने धरना प्रदर्शन आंदोलन कर बैठक किया जिसके बाद सार्थक पहल हुई, दल्लीराजहरा नगर के डीएवी स्कूल के पास सीवरेज पाइपलाइन कार्य के दौरान 10 फीट गहरे गड्ढे में मिट्टी धंसने से तीन मजदूरों स्व. किशुन कुमार, स्व. राकेश कुमार और स्व. बैशाखिन की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
लेकिन हादसे के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राज्य शासन, जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगरवासियों में सबसे ज्यादा आक्रोश इस बात को लेकर है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक मुख्यमंत्री की ओर से मृतक परिवारों के लिए किसी विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं हुई। सांसद की ओर से भी कोई घोषणा नहीं की गई, वहीं क्षेत्रीय विधायक की ओर से भी केवल सीएसआर मद से वो भी जिला प्रशासन से 02 लाख काज्ञआश्वासन मिला, विधायक निधि से अलग से राहत पैकेज की घोषणा नहीं हुई।





लोगों का कहना है कि पड़ोसी दुर्ग जिले में सिलेंडर विस्फोट से चार लोगों की मौत पर मुख्यमंत्री द्वारा तत्काल 9-9 लाख रुपए सहायता राशि घोषित की गई थी, लेकिन दल्लीराजहरा के तीन मजदूर परिवारों के लिए अब तक कोई सरकारी विशेष घोषणा नहीं होना क्षेत्र के साथ भेदभाव जैसा महसूस कराया जा रहा है।
18 लाख का दावा, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
बीएसपी हॉस्पिटल में हुई बैठक में प्रशासन, बीएसपी प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और परिजनों के बीच 18-18 लाख रुपए सहायता देने पर सहमति बनी, जिसके बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया गया।
लेकिन बाद में सामने आया कि यह राशि एकमुश्त नहीं है। इसमें —
₹5 लाख श्रम विभाग से
₹5 लाख ठेकेदार की ओर से
₹2 लाख सीएसआर मद से
₹50 हजार नगद सहायता
शेष राशि अन्य प्रक्रियाओं और मदों से देने की बात कही गई
अब पीड़ित परिवार पूछ रहे हैं कि आखिर यह पैसा कब मिलेगा? क्या इसकी कोई लिखित गारंटी है? कौन विभाग भुगतान करेगा और कब तक करेगा?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि “घोषणाएं कैमरे के सामने हो गईं, लेकिन पीड़ित परिवारों के हाथ अब तक सिर्फ आश्वासन आया है।
घटना या लापरवाही से हुई मौत?
घटना को लेकर सबसे बड़ा आरोप सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लग रहा है। बताया जा रहा है कि मजदूरों को 10 फीट गहरे गड्ढे में बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के उतारा गया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्य के दौरान चैन माउंटिंग मशीन (पोकलेन) का चैन टूट गया, जिससे पास की पाइपलाइन खिसक गई और भारी मात्रा में मिट्टी मजदूरों के ऊपर आ गिरी।
अब सवाल उठ रहा है
क्या मशीन का वैध बीमा था?
यदि बीमा था तो दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
यदि बीमा नहीं था तो बिना बीमा मशीन को बीएसपी के ठेका कार्य में कैसे लगाया गया?
सुरक्षा ऑडिट किस अधिकारी ने किया था?
ठेकेदार और इंजीनियरों पर FIR अब तक क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति बिना दस्तावेज वाहन चलाए तो तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन इतनी बड़ी परियोजना में नियमों की अनदेखी के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी…
तीन गरीब मजदूरों की मौत के बाद भी आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या दल्लीराजहरा के मजदूर परिवारों को सिर्फ आश्वासन मिलेगा या वास्तव में न्याय भी मिलेगा?
और सबसे अहम — क्या गरीब मजदूरों की जान की कीमत सिर्फ फाइलों और घोषणाओं तक सीमित रह जाएगी?
जनता और संगठनों में भारी आक्रोश
जनमुक्ति मोर्चा सहित कई सामाजिक संगठनों ने इस घटना को “मजदूरों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़” बताया है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष जीत गुहा नियोगी के निर्देश पर नगर अध्यक्ष महेंद्र गंजीर एवं छत्तीसगढ़ सचिव बसंत रावटे ने बीएसपी प्रबंधन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।
आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि मजदूरों की जान की कीमत सिर्फ घोषणा और कागजी आश्वासन नहीं हो सकती। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
पीड़ित परिवारों का दर्द
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके घर का कमाने वाला सदस्य चला गया और अब भविष्य अंधकारमय हो गया है। परिवारों ने कहा कि “हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए। जो लोग जिम्मेदार हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए और मुआवजा तत्काल मिलना चाहिए।”
अपर कलेक्टर सी.के. कौशिक का पक्ष
अपर कलेक्टर सी.के. कौशिक ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। पीड़ित परिवारों को सहायता दिलाने की प्रक्रिया जारी है तथा सुरक्षा मानकों के उल्लंघन संबंधी बिंदुओं की भी जांच की जाएगी।
अनुविभागीय अधिकारी सुरेश साहू का पक्ष
एसडीएम सुरेश साहू ने कहा कि घटना दुखद है। प्रशासन की प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाना है। मामले की विस्तृत जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्रीय विधायक का पक्ष
अनिला भेड़िया ने कहा कि घटना बेहद दुखद है और शासन स्तर पर पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। और जिला प्रशासन सीएसआर मद के माध्यम से ₹2 लाख भी दिलाए जाने की मांग की गई है,
नगर पालिका अध्यक्ष का पक्ष
तोरण लाल साहू ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
बीएसपी प्रबंधन का पक्ष
बीएसपी महाप्रबंधक आर.बी. अहिरवार ने कहा कि घटना की जांच की जा रही है तथा मृतक परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया जारी है।
Author: Deepak Mittal










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