कोर्ट और सरकार का आदेश दरकिनार,मांगलिक कार्यक्रमों व विसर्जन में भी बज रहे कानफोडू डीजे..

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शैलेश शर्मा  :  घरघोड़ा : हाईकोर्ट और सरकार के आदेश के बाद भी नगर में मांगलिक कार्यक्रमों व विसर्जन के दौरान समितियां कान फोड़ू डीजे बजा रही हैं। फिल्मी और फूहड़ अश्लील गानों के तेज शोर के कारण एक ओर जहां लोग परेशान हो रेह हैं तो वहीं लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं लेकिन सरकारी आदेशों के पालन में पुलिस और प्रशासन ने खानापूॢत बैठक कराने के अलावा अब तक कोई सख्ती नहीं दिखाई है।

दरअसल प्रदेश में हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। कोर्ट ने कानफोडू साउंड सिस्टम और डीजे पर कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को आदेशित किया हुआ है। वहीं राज्य सरकार द्वारा कलेक्टर और एसपी को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद भी शहर में कानफोडू डीजे पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

कुछ दिनों से शहर के बीच, मोहल्लों से ये डीजे वाले बाबू डंके की चोट पर ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं। वहीं भक्ति संगीत की जगह उनके द्वारा फिल्मी व फूहड़ गाने बजाने से लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं। इसके अलावा समितियों द्वारा भी पंडालों में व विसर्जन के दौरान सडक़ों पर हाई साउंड सिस्टम लगा कर शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है।

जिससे डीजे के आसपास से गुजरने वाले लोगों की धडक़नें तेज हो रही है। वहीं दिल के मरीजों को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद भी अभी तक घरघोड़ा पुलिस व प्रशासन द्वारा डीजे पर कोई कार्रवाई नहीं की  है।

जबकि हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि जब भी शादियां, जन्मदिनों, धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों में निर्धारित मापदण्डों से अधिक ध्वनि प्रदूषण होने पर अधिकारी जाएं तो वे लोगों की भावना की कद्र करते हुए नम्रतापूर्वक उन्हें माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने को कहें। अगर आयोजक विरोध करता है तो उसके विरूद्ध कोर्ट में कार्रवाई की जाए।

इसके अतिरिक्त संबंधित अधिकारी आयोजक के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने पर अवमानना का प्रकरण उच्च न्यायालय में दायर करें। ध्वनि प्रदूषण यंत्र, टेन्ट हाउस, साउण्ड सिस्टम प्रदायकर्ता या डीजे वाले का पाया जाता है तो उसे सीधे जप्त किया जाएगा।

वाहनों में डीजे बजने पर होगा परमिट निरस्त

दरअसल अक्सर यह देखा जा रहा है कि लोगों की डिमांड पर डीजे संचालक वाहनों में डाला की उचांई से भी काफी उपर तक साउंड सिस्टम लगा रहे हैं। वहीं साउंड सिस्टम की चौड़ाई भी इतनी ज्यादा रहती है कि वो डाला से बाहर काफी जगह घेरता है।

इस पर न तो कभी आरटीओ विभाग के अधिकारी कार्रवाई करते हैं और न ही ट्रैफिक पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। ऐसे में कोर्ट ने कहा है कि कलेक्टर व एसपी सुनिश्चित करें कि कोई भी वाहन पर साउण्ड बाक्स न बजे। वाहन में साउण्ड बाक्स मिलने पर साउण्ड बाक्स जब्त कर वाहन का रिकार्ड रखा जाए।

जप्त साउण्ड बाक्स को मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) के आदेश के बाद ही छोडा जाना है। वहीं दूसरी बार पकड़े जाने पर उस वाहन का परमिट निरस्त किया जाए। वहीं कोर्ट के आदेश के बिना उस वाहन को कोई भी नया परमिट जारी नहीं किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियम का उल्लघंन करते पाए जाने पर संबंधित अधिकारी पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल के सामने बज रहे कानफोडू डीजे


दरअसल अस्पताल मुख्य मार्ग पर स्थित है।  वर्तमान में गणेश,विश्वकर्मा विसर्जन का दौर जारी है। ऐसे में कानफोडू डीजे अस्पताल के बाहर भी बजते रहते हैं। जिससे यहां भर्ती मरीजों को काफी हद तक परेशानी होती है।

जबकि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, कोर्ट, आफिस से 100 मीटर एरियल डिस्टेन्स पर लाउड स्पीकर बजने पर कलेक्टर, एसपी, डीएसपी या प्राधिकृत अधिकारी को ध्वनि प्रदूषण यंत्रों को जप्त करना होगा।

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Author: Deepak Mittal

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