अगले साल से टोल न लेने पर विचार करें: प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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नई दिल्ली: देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई अहम टिप्पणियां कीं। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि प्रदूषण की समस्या का तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान निकालना होगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि अगले साल से यह तय किया जाए कि प्रदूषण के गंभीर महीनों में टोल प्लाजा पर कोई शुल्क न लिया जाए।

सीजेआई ने कहा कि नगर निगम को 31 दिसंबर तक टोल प्लाजा पर शुल्क नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम होगी और प्रदूषण पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगले साल से तय करें कि टोल नहीं लिया जाए।”

1 अक्टूबर से 31 जनवरी तक टोल न लेने की बात

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में 1 अक्टूबर से 31 जनवरी तक टोल वसूली पर रोक लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसी मांग को लेकर कोर्ट ने CAQM (Commission for Air Quality Management) को नोटिस जारी किया है। हालांकि, स्कूल बंद करने के फैसले में कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

मजदूरों के भुगतान पर सख्त निर्देश

निर्माण कार्यों पर रोक के चलते खाली बैठे मजदूरों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि श्रमिकों का सत्यापन कर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाए। CJI ने जोर देते हुए कहा कि मजदूरों को समय पर पैसा मिलना चाहिए, तभी इसका कोई मतलब होगा। केवल खाते में पैसा भेजने की औपचारिकता से समाधान नहीं निकलेगा।

दिल्ली-एनसीआर के राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे मजदूरों को भुगतान की स्थिति पर अगली सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।

दीर्घकालिक नीति की जरूरत

प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग और आम नागरिक—सभी एक ही प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। ऐसे में हर साल दिसंबर में काम ठप होने और जनवरी-फरवरी में दोबारा शुरू होने की स्थिति से बचने के लिए पहले से ठोस नीति बनानी होगी।

अगली सुनवाई 6 जनवरी को

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को लेकर अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि छुट्टियों के बाद प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि केवल उम्मीद से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान पर काम करना होगा।

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Author: Deepak Mittal

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