पर्यटन नक्शे पर तेजी से उभरता छत्तीसगढ़, होमस्टे नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

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रायपुर: प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और हरित वातावरण के लिए पहचाना जाने वाला छत्तीसगढ़ अब देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देते हुए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा, वैश्विक मंचों पर बढ़ी मौजूदगी

राज्य सरकार द्वारा बीते दो वर्षों में पर्यटन के व्यापक प्रचार-प्रसार और आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ पर्यटन ने स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय यात्रा कार्यक्रमों में भाग लेकर अपनी वैश्विक उपस्थिति मजबूत की है।

भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर, फिल्म सिटी कॉरिडोर और विभिन्न पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों को गति दी गई है। केंद्र सरकार ने मायाली बग़ीचा को प्रमुख पर्यटन सर्किट के रूप में मंजूरी देते हुए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, जिसका भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ किया जा चुका है।

2025–30 की नई होमस्टे नीति को मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 2025 से 2030 तक के लिए नई होमस्टे नीति को मंजूरी दी गई है। इस नीति के तहत पांच वर्षों में 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

यह नीति विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी एवं पूर्व माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय संस्कृति और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा

होमस्टे परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण जीवनशैली, आदिवासी कला, लोकनृत्य, पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। इससे स्थानीय कारीगरों, किसानों और कलाकारों को अपने उत्पादों की सीधी बिक्री का अवसर मिलेगा।

सरकार का कहना है कि यह नीति न केवल आर्थिक विकास का माध्यम बनेगी, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण को भी बल देगी। साथ ही ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।

मैनपाट महोत्सव को मिलेगा स्थायी स्वरूप

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि मैनपाट में आयोजित मैनपाट महोत्सव अब हर वर्ष नियमित रूप से मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सरगुजा की संस्कृति और अस्मिता को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगा।

मैनपाट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा की गई है, वहीं सीतापुर में सर्वसुविधायुक्त बस स्टैंड के निर्माण की भी घोषणा की गई है। भविष्य में महोत्सव की तिथियां पूर्व निर्धारित की जाएंगी और इसे और भव्य स्वरूप देने के लिए अतिरिक्त राशि स्वीकृत की जाएगी।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई दिशा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से जूझता रहा है, लेकिन अब स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का है।

सरकार का मानना है कि पर्यटन विकास से इन क्षेत्रों में शांति, विश्वास और आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा, जिससे युवाओं को मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

सतत और अनुभवात्मक पर्यटन पर जोर

राज्य सरकार सतत (सस्टेनेबल) और अनुभवात्मक पर्यटन मॉडल को बढ़ावा दे रही है। होमस्टे मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर आधारित है, जिससे बड़े होटल उद्योगों से होने वाले पर्यावरणीय दबाव को कम किया जा सकेगा।

सरकार की रणनीति के तहत छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख ईको-एथनिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्राकृतिक जंगल, पहाड़, झरने और आदिवासी परंपराएं राज्य की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही हैं।

समग्र रूप से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ पर्यटन अब योजनाबद्ध विकास, स्थानीय सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण के मॉडल के साथ राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

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Author: Deepak Mittal

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