ताजा खबर
🇮🇳 अमेरिकी टेक कंपनियों पर भारत सरकार कस सकती है लगाम, डिजिटल संप्रभुता की दिशा में बढ़ा कदम! भारी मात्रा में अवैध शराब के साथ युवक गिरफ्तार, 80 पौवा देशी मसाला शराब जब्त जापान-दक्षिण कोरिया यात्रा से लौटे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का माना एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत, बोले- ‘छत्तीसगढ़ को मिलेगा वैश्विक निवेश का लाभ’ नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से मिला छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स का प्रतिनिधिमंडल, रोजगार और स्वदेशी अभियान पर हुई विशेष चर्चा बस्तर में बाढ़ का कहर: 5 दिन बाद झाड़ियों से बरामद हुई दो बच्चियों की लाश… गांव में पसरा मातम! गौवंश के पीछे कौन? धमतरी में पिकअप से हो रही थी तस्करी, पुलिस ने दबोचे दो आरोपी

बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो हादसा,हाईटेंशन तार की चपेट में आया सफाईकर्मी..

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

बिलासपुर। शनिवार दोपहर रेलवे कोचिंग डिपो में बड़ा हादसा हो गया, जिसने रेलवे प्रशासन और ठेकेदार की लापरवाही को फिर उजागर कर दिया। मूलमुला निवासी प्रताप बर्मन, जो ठेकेदार के अधीन क्लीनर के रूप में काम करता है, एसी कोच की सफाई के दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और वह वर्तमान में अपोलो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

जानकारी के अनुसार, प्रताप शनिवार को रोज की तरह ड्यूटी पर पहुंचा और दोपहर करीब 1 बजे एसी कोच के ऊपर चढ़कर सफाई करने लगा। इसी दौरान ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तार से करंट दौड़ा और वह उसकी चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रताप को दो बार जोरदार करंट लगा। झटके इतने तेज थे कि वह कुछ देर तक कोच की छत पर तड़पता रहा और फिर नीचे गिर पड़ा। हादसे में उसके सिर, नाक, मुंह और शरीर के बड़े हिस्से पर गंभीर चोटें और जलन हुईं।

हादसे के बाद प्रताप को तत्काल रेलवे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां आवश्यक उपकरण और सुविधा नहीं मिली। इसके बाद उसे सिम्स अस्पताल भेजा गया, जहां बर्न वार्ड की स्थिति बेहद खराब पाई गई। अंततः उसे निजी अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर बताया। इलाज में हुई देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

जानकारी के मुताबिक, प्रताप जिस रैक की सफाई कर रहा था, उसी पर वंदे भारत ट्रेन लाने की तैयारी चल रही थी। इसी कारण हाईटेंशन बिजली सप्लाई बंद नहीं की गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि बिना बिजली सप्लाई बंद किए और सुरक्षा इंतज़ाम किए बिना मजदूर को काम पर भेजना गंभीर लापरवाही है। ठेकेदार और रेलवे प्रशासन दोनों को इस हादसे का जिम्मेदार बताया जा रहा है।

कर्मचारियों ने बताया कि डिपो में सुरक्षा इंतज़ाम न के बराबर हैं। ठेकेदार मजदूरों से तीन-तीन महीने का अनुबंध कराता है और उन्हें ऊंचाई पर काम करने भेज देता है। वहां उनके पास न हेलमेट होता है, न सेफ्टी बेल्ट और न इंसुलेटेड औजार। ऐसे हालात में हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है। कर्मचारियों ने कहा कि पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन हर बार रेलवे प्रशासन और ठेकेदार जिम्मेदारी से बच निकलते हैं।

इस हादसे से गुस्साए कर्मचारियों ने रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक मजदूरों की सुरक्षा के ठोस कदम नहीं उठाए जाते, ऐसे हादसे होते रहेंगे। उनका आरोप है कि ठेकेदार मजदूरों को केवल काम लेने का साधन समझते हैं, उनकी जान की कीमत किसी के लिए मायने नहीं रखती।

यह हादसा सिर्फ प्रताप बर्मन की त्रासदी नहीं है, बल्कि उस पूरे सिस्टम की पोल खोलता है, जहां सुरक्षा इंतज़ामों की अनदेखी कर मजदूरों की जान को खतरे में डाला जाता है। सरकारी और अर्ध-सरकारी ठेकों में मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी आम बात बन गई है।

फिलहाल प्रताप अपोलो अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसके शरीर का बड़ा हिस्सा झुलस चुका है और उसे लगातार निगरानी में रखा गया है। परिवार और सहकर्मी उसकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, जबकि रेलवे प्रशासन और ठेकेदार अब तक जिम्मेदारी तय करने से बचते नजर आ रहे हैं।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

August 2025
S M T W T F S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  

Leave a Comment