कोलकाता: Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अब हजारों मतदाताओं की सुनवाई शुरू हो चुकी है। इसी बीच एक ऐसा मुद्दा सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग की नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सेकेंडरी एग्जाम का एडमिट कार्ड मतदाता सत्यापन के लिए वैध दस्तावेज माना जाएगा?
दरअसल, SIR फॉर्म में गड़बड़ी पाए जाने पर जिन मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने सेकेंडरी परीक्षा पास नहीं की, लेकिन उनके पास माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड मौजूद है, जिसमें जन्मतिथि दर्ज है। यही जन्मतिथि एक तरह से बर्थ सर्टिफिकेट के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
बंगाल ने केंद्र से की सिफारिश
पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने इस मसले पर राष्ट्रीय चुनाव आयोग को सिफारिश भेजी है कि सेकेंडरी एडमिट कार्ड को वैध दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाए।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,
“अगर राष्ट्रीय चुनाव आयोग हमारी सिफारिश स्वीकार करता है, तो SIR सुनवाई में माध्यमिक एडमिट कार्ड को दस्तावेज के तौर पर मान्य किया जाएगा।”
अगर ऐसा होता है, तो यह नियम पूरे पश्चिम बंगाल के सभी वोटरों पर लागू होगा।
बिहार में NO, बंगाल बनेगा पहला राज्य?
अब तक चुनाव आयोग केवल मान्यता प्राप्त बोर्ड या यूनिवर्सिटी द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन या शैक्षणिक प्रमाणपत्र को ही 13 अधिसूचित दस्तावेजों में शामिल करता रहा है।
हालांकि, बिहार में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के मैट्रिक एडमिट कार्ड को वैध दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया गया था।
अगर बंगाल की सिफारिश मान ली जाती है, तो पश्चिम बंगाल देश का पहला राज्य होगा, जहां सेकेंडरी एडमिट कार्ड को SIR में वैध दस्तावेज का दर्जा मिलेगा।
27 दिसंबर से शुरू हुई सुनवाई, बढ़ा सियासी ताप
बंगाल में SIR की सुनवाई 27 दिसंबर से शुरू हो चुकी है। तृणमूल कांग्रेस ने बुजुर्गों, बीमार और गर्भवती महिलाओं को सुनवाई केंद्र बुलाए जाने का विरोध किया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए साफ किया कि—
-
85 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
-
गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति
-
गर्भवती महिलाएं
-
दिव्यांग मतदाता
👉 इन सभी की घर पर ही सुनवाई होगी।
निर्देशों की अनदेखी पर सख्त चेतावनी
इसके बावजूद आयोग को शिकायतें मिलीं कि कई जगह बुजुर्गों और बीमारों को सुनवाई केंद्र बुलाया जा रहा है। इस पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि
यदि निर्देशों का उल्लंघन हुआ, तो BLO और BLO सुपरवाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि घर पर सुनवाई सुनवाई अवधि के अंतिम सप्ताह में कराई जाएगी।
चाय बागान मजदूरों को भी राहत
इसी बीच चुनाव आयोग ने दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के चाय बागान मजदूरों को लेकर भी अहम निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि
डॉक्यूमेंट की कमी के कारण मजदूरों के नाम SIR लिस्ट से न हटें, इसके लिए चाय बागान लेबर एक्ट के तहत उपलब्ध PF और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन किया जाएगा।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8162547
Total views : 8187002