दिल्ली: डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED) ने हैदराबाद से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी मामले में जांच में दखल देने और अधिकारियों को धमकाने के आरोप में कल्याण बनर्जी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ED ने बनर्जी को 10 जनवरी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। आरोपी को 11 जनवरी को स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 23 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ED ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी की जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या दबाव बनाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
₹5,978 करोड़ की ठगी का मामला
ED की यह जांच कई राज्यों में दर्ज FIR के आधार पर नौहेरा शेख और अन्य के खिलाफ की जा रही है। जांच में सामने आया है कि नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों ने भोले-भाले निवेशकों से 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक रिटर्न का लालच देकर करीब 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई, लेकिन न तो वादा किया गया रिटर्न दिया गया और न ही मूलधन लौटाया गया।
ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल नौहेरा शेख ने अपने, अपनी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदने में किया। अब तक ED ने लगभग 428 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं और हैदराबाद की स्पेशल PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की जा चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से नीलामी प्रक्रिया
ED ने कोर्ट में अटैच संपत्तियों की नीलामी कर उससे प्राप्त राशि धोखाधड़ी के शिकार निवेशकों को लौटाने के लिए आवेदन दिया था। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद MSTC के जरिए कई संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई।
हालांकि, नौहेरा शेख ने नीलामी प्रक्रिया को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाई कोर्ट में बार-बार याचिकाएं दाखिल कीं। 5 जनवरी को प्रस्तावित नीलामी को रोकने के लिए दाखिल एक याचिका को तेलंगाना हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए नौहेरा शेख पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया।
फर्जी पहचान बनाकर दबाव बनाने की साजिश
सूत्रों के अनुसार, संपत्तियों को कानूनी तौर पर बचाने में असफल रहने के बाद नौहेरा शेख ने कथित तौर पर कल्याण बनर्जी की सेवाएं लीं। बनर्जी ने खुद को बड़े अधिकारियों और नेताओं का करीबी बताकर ED अधिकारियों को कॉल और मैसेज किए तथा नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर की कोशिश की। जब अधिकारियों ने कानून के अनुसार काम करने की बात कही तो उसने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।
जांच में सामने आया कि बनर्जी एक धोखेबाज था, जो अलग-अलग विभागों का कंसल्टेंट बनकर वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से नजदीकियां जताता था। उसके मोबाइल सिम के KYC दस्तावेजों में भी अधूरा पता पाया गया। इंटेलिजेंस के आधार पर ED ने 10 जनवरी को सिकंदराबाद में उसके ठिकानों पर PMLA की धारा 17 के तहत सर्च कार्रवाई की।
आपत्तिजनक चैट और स्वीकारोक्ति
सर्च के दौरान उसके मोबाइल फोन से नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों के साथ आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट मिली, जिससे पता चला कि वह जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। पूछताछ में बनर्जी ने नकली पहचान बनाकर अधिकारियों पर दबाव डालने और नौहेरा शेख के इशारे पर काम करने की बात स्वीकार की है।
ED ने दोहराया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और जांच में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
Author: Deepak Mittal










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