नई दिल्ली: करेला का नाम सुनते ही अक्सर लोग मुंह बना लेते हैं, लेकिन यह कड़वी सब्जी औषधीय गुणों का खजाना मानी जाती है। आयुर्वेद में करेले को ‘करवेल्लक’ कहा गया है, जो शरीर को अंदर से शुद्ध करने और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। करेला न सिर्फ खाने में, बल्कि लगाने में भी लाभकारी माना जाता है।
रक्त शुद्धिकरण से लेकर पाचन तक लाभ
करेला शरीर में विटामिन A, B और C की कमी को पूरा करता है और रक्त को शुद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह दूषित रक्त, बढ़ी हुई शर्करा और आंतों के कीड़ों को खत्म करने की क्षमता रखता है। करेला अग्नि और अग्न्याशय तक असर डालकर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर को भीतर से साफ करता है।
घाव और त्वचा रोगों में असरदार
यदि शरीर पर किसी तरह के घाव हैं, तो करेले का लेप दवा की तरह काम करता है। यह घाव भरने, संक्रमण रोकने और सूजन कम करने में सहायक है। इसके अलावा, त्वचा विकारों की जड़ तक जाकर करेला खुजली, रूखापन और मुंहासों से राहत दिलाने में मदद करता है।
आंतों की सफाई में उपयोगी
लंबे समय तक पेट साफ न होने से आंतों में कीड़े और हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ऐसे में भूख न लगना, खाना खाते ही शौच लगना जैसी समस्याएं होती हैं। करेला जूस या सलाद के रूप में सेवन करने से आंतों का डिटॉक्स होता है और पाचन सुधरता है।
स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए लाभ
करेला स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह दूध बनाने वाले हार्मोन के उत्पादन में मदद करता है। हालांकि, इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
कड़वापन कैसे करें कम
करेले का कड़वापन कम करने के लिए उस पर नमक लगाकर कुछ घंटों के लिए रख दें। इससे करेला पानी छोड़ देता है और उसका कड़वापन काफी हद तक कम हो जाता है।
मुंहासों में रामबाण
चेहरे पर बार-बार होने वाले एक्ने और मुंहासे अक्सर रक्त की अशुद्धि का संकेत होते हैं। ऐसे में रोजाना करेले के जूस का सेवन करने से रक्त शुद्ध होता है, त्वचा में निखार आता है और मुंहासों से राहत मिलती है।
कुल मिलाकर, करेला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और खुद को ठीक करने की प्राकृतिक शक्ति को सक्रिय करता है। कड़वा जरूर है, लेकिन सही तरीके से सेवन करने पर सेहत के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है।
Author: Deepak Mittal










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