Mumbai :ग्रेटर नोएडा में कार के नाले में गिरने से 27 वर्षीय युवराज मेहता की मौत के मामले ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना पर लोकप्रिय टीवी अभिनेता अभिनव शुक्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन विभाग, पुलिस और संबंधित अधिकारियों की जमकर आलोचना की है।
अभिनव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए उन सभी विभागों से इस्तीफे की मांग की, जो युवराज मेहता को बचाने में विफल रहे। वीडियो में अभिनेता ने कहा कि हादसे के बाद युवक ने फोन पर मदद की गुहार लगाई थी। मौके पर अग्निशमन विभाग, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें पहुंचीं, क्रेन और रस्सियां भी लाई गईं, लेकिन दो घंटे तक कोई भी उसे बचाने के लिए पानी में नहीं उतरा। इस दौरान युवराज अपनी कार पर खड़ा होकर लगातार “मुझे बचाओ” की गुहार लगाता रहा।
अभिनेता ने कहा कि जिन विभागों का काम लोगों की जान बचाना है, वे मौके पर मौजूद रहते हुए भी निष्क्रिय बने रहे। अभिनव शुक्ला ने खास तौर पर एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी बॉय की तारीफ की, जिसने अपने शरीर में रस्सी बांधकर युवक को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर एक आम नागरिक इतना साहस दिखा सकता है, तो प्रशिक्षित एजेंसियां क्यों नाकाम रहीं।
अभिनव शुक्ला ने पोस्ट में लिखा, “एनडीआरएफ पर शर्म आती है, फायर डिपार्टमेंट पर शर्म आती है और अधिकारियों पर भी शर्म आती है। करदाताओं के पैसे से प्रशिक्षण लेने के बावजूद अगर आप एक बुनियादी काम नहीं कर सकते, तो ऐसे विभागों के अस्तित्व का क्या मतलब है? फ्लिपकार्ट डिलीवरी बॉय को सलाम, जिसने कोशिश की।”
यह हादसा 16–17 जनवरी की रात नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के सेक्टर-150 चौराहे पर हुआ, जहां एक कार नाले में गिर गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, युवराज मेहता की मौत का कारण “डूबने से पहले दम घुटना और उसके बाद हृदय गति रुकना” बताया गया है।
घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नोएडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और नोएडा मेट्रो रेल निगम (एनएमआरसी) के प्रबंध निदेशक एम. लोकेश को उनके पद से हटा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन के निर्देश दिए हैं। मेरठ जोन के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) के नेतृत्व में गठित एसआईटी में मेरठ के संभागीय आयुक्त और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता शामिल हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, एसआईटी को पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
इस पूरे मामले ने आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
Author: Deepak Mittal










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