हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाना संभव: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि यदि कानून में निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं, तो हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय कानून के तहत हत्या जैसे अपराध को जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी एक नाबालिग की अपील खारिज करते हुए की। नाबालिग ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें एक लड़के की हत्या के मामले में उसके खिलाफ बालिग के रूप में मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी।

नाबालिगों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने से संबंधित कानूनी व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।

यह मामला 16 वर्षीय किशोर से जुड़ा है, जिस पर बिहार में कथित तौर पर एक लड़के की गर्दन काटकर हत्या करने का आरोप है। मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोपी पर बालिग के रूप में मुकदमा चलाया जाना आवश्यक है। इसके बाद किशोर न्याय बोर्ड को मामले को नियमित आपराधिक अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

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Author: Deepak Mittal

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