राजनांदगांव / डोंगरगढ़ राजा शर्मा
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के मोहारा सेवा सहकारी समिति में देर रात ग्रामीणों और किसानों ने कथित अवैध धान परिवहन का बड़ा खेल पकड़ लिया। समिति से धान भरकर निकल रहे मालवाहक को ग्रामीणों ने रंगे हाथों रोक दिया और समिति प्रबंधक संतोष वर्मा पर धान को कोचियों के हाथ बेचने का आरोप लगाया।
ग्रामीण देर रात तक एफआईआर की मांग पर डटे रहे। सूत्रों के मुताबिक आरोपी प्रबंधक को सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं का संरक्षण मिलने की चर्चा भी गांव में तेज रही, जिस कारण पहले की शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
मोहारा सेवा सहकारी समिति में ग्रामीणों की सतर्कता ने देर रात कथित धान घोटाले की परतें खोल दीं। किसानों ने समिति परिसर के अंदर ही धान से भरे मालवाहक को पकड़ लिया। आरोप है कि बिना डीओ और वैध दस्तावजों के समिति का धान रात के अंधेरे में बाहर भेजा जा रहा था
ग्रामीणों का कहना है कि धान खरीदी के दौरान किसानों से 41 किलो 700 ग्राम तक धान लिया गया और अब वही अतिरिक्त धान व्यापारियों को बेचने की तैयारी थी। सूचना मिलते ही पुलिस, तहसीलदार और खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीण सिर्फ जांच नहीं बल्कि तत्काल एफआईआर की मांग पर अड़े रहे।
आक्रोश इतना बढ़ा कि अधिकारियों को रातभर गांव में रुकने का दबाव बनाया गया। ग्रामीणों ने साफ कहा — जब तक समिति प्रबंधक पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, कोई नहीं जाएगा। आखिरकार देर रात 2 बजे जांच टीम को लिखित में कार्रवाई का भरोसा देना पड़ा, तब जाकर मामला शांत हुआ।
सूत्रों के अनुसार समिति प्रबंधक संतोष वर्मा पहले भी किसानों की शिकायतों में घिर चुका है। 11 गांवों के किसानों द्वारा पूर्व में शिकायतें दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक संरक्षण दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
पकड़े गए वाहन चालक सुंदर लाल साहू ने बताया कि वह गाड़ी मालिक राजू वर्मा के कहने पर वाहन लेकर समिति पहुंचा था। वहीं समिति प्रबन्धक सन्तोष वर्मा ने पूरे मामले से दूरी बनाते हुए समिति से फरार हो गया।
समिति अध्यक्ष सतीश वर्मा ने कहा कि धान “शॉर्टेज भरने” के लिए ले जाने की जानकारी उन्हें दी गई। लेकिन सवालिया निशान यह हैं की अगर धान की कमी को पूरा करना होता तो देर रात में बिना वैध कागज के शॉर्टेज भरना अपने आप में अपराध दिखता हैं।
फिलहाल राजस्व, खाद्य और पुलिस विभाग की संयुक्त जांच पूरी हो चुकी है। तहसीलदार अमीय श्रीवास्तव के मुताबिक प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा जाएगा और समिति प्रबंधक के खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज की जाएगी।
यह पूरा मामला एक बार फिर साबित करता है कि अगर ग्रामीण जागरूक हों, तो रात के अंधेरे में चल रहे खेल भी उजाले में आ जाते हैं।
Author: Deepak Mittal










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