केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी जी-रामजी कानून लागू करने का फैसला किया है। नया कानून पहली जुलाई से पूरे देश में लागू हो जाएगा। इसके साथ ही पुराना मनरेगा कानून समाप्त हो जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला नया विकास मॉडल है। सरकार इसे ग्रामीण विकास के नए दौर की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि नए कानून से मजदूरों, किसानों एवं गांवों को ताकत मिलेगी। यदि सही तरीके से लागू हो गया तो यह योजना सिर्फ रोजगार गारंटी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांवों की बुनियादी संरचना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा भी दे सकती है।
सबसे बड़ा बदलाव रोजगार गारंटी के दिनों में हुआ है। अभी मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में सौ दिन काम का कानूनी अधिकार है। नई व्यवस्था में इसे 125 दिन कर दिया गया है। यानी श्रमिक परिवारों को अतिरिक्त 25 दिन काम मिलेगा। इससे गांवों में नकदी प्रवाह बढ़ने और श्रमिकों की आय में मजबूती आएगी।
Author: Deepak Mittal









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