छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार के तहत आरक्षित सीटों में कमी और निजी स्कूलों की अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया।
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में कई विरोधाभास पाए और स्कूल शिक्षा विभाग को सभी बिंदुओं पर विस्तृत और स्पष्ट जवाब देने के निर्देश दिए।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि जब पहले आरटीई के तहत करीब 85 हजार सीटें थीं तो उनमें लगभग 30 हजार की कमी कैसे आई। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि इस बार सुनवाई में राज्य की ओर से बताया गया कि सचिव चुनाव आयोग की ड्यूटी के कारण असम में तैनात हैं, इसलिए उनकी जगह संयुक्त सचिव ने 21 मार्च को हलफनामा प्रस्तुत किया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर तो ले लिया, लेकिन उसमें दी गई जानकारी पर असंतोष जताया।
सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी मुद्दों पर विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करें। साथ ही, जिन मामलों में अब तक राज्य सरकार ने जवाब दाखिल नहीं किया है, उन्हें भी जल्द प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
Author: Deepak Mittal










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