मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार, वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति प्रभावित होने और क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की खबरों से वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है।

इस बीच Donald Trump ने तेल की कीमतों में आई तेजी का बचाव करते हुए कहा कि यह Iran के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करने के बाद तेल की कीमतें फिर से कम हो जाएंगी और वैश्विक सुरक्षा के लिए यह एक छोटी कीमत है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। West Texas Intermediate (WTI) क्रूड की कीमत करीब 20.75 प्रतिशत या 18.83 डॉलर बढ़कर 109.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि Brent Crude की कीमत भी 18 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर करीब 109.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों के अनुसार यह उछाल इसलिए आया है क्योंकि आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार क्षेत्र में हमलों और बढ़ते खतरे के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी हो गई है और कई जहाज इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र के कुछ तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन भी कम करना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इस स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला है। एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही कई प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। Nikkei 225 करीब 5 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि KOSPI में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बाजार अनुमानों के अनुसार साल के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। ऊर्जा इतिहासकार Daniel Yergin के मुताबिक यह स्थिति वैश्विक तेल उत्पादन के लिहाज से इतिहास के सबसे बड़े व्यवधानों में से एक बन सकती है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। आमतौर पर तेल महंगा होने से परिवहन, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

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Author: Deepak Mittal

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