मुंबई: जंग की आहट से बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये डूबे

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मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बीएसई का सेंसेक्स 2,743 अंक यानी 3.38% टूटकर 78,543 पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 519 अंक या 2.06% गिरकर 24,659 पर पहुंच गया।

बैंक निफ्टी में 1,300 अंकों से अधिक की गिरावट देखी गई। हालांकि बाद में बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई और सेंसेक्स करीब 1,000 अंक की गिरावट के साथ 80,282 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 24,900 के नीचे बना रहा।

6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन घटी

भारी बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन शुक्रवार के 463.50 लाख करोड़ रुपये से घटकर लगभग 457.50 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

सेक्टोरल दबाव, सिर्फ मेटल में मजबूती

बीएसई टॉप-30 के 29 शेयर लाल निशान में रहे। केवल भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में करीब 1% की तेजी देखी गई।

  • इंडिगो के शेयर करीब 5% टूटे

  • लार्सन एंड टुब्रो (L&T) में लगभग 4% गिरावट

  • अडानी पोर्ट्स में 3% की कमजोरी

ऑटो, एफएमसीजी, आईटी, बैंकिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सेक्टर में लगभग 1% तक गिरावट दर्ज की गई। केवल मेटल सेक्टर में हल्की मजबूती रही, जिसे विशेषज्ञ सुरक्षित निवेश (सेफ एसेट) की ओर रुख मान रहे हैं।

लोअर सर्किट और 52 हफ्ते के निचले स्तर

बीएसई पर सक्रिय 3,660 शेयरों में से 2,985 शेयर गिरावट में रहे, जबकि 162 शेयरों में लोअर सर्किट लगा। 663 शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचे।

एशियाई बाजारों में भी दबाव

वैश्विक तनाव का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा।

  • निक्केई 225 874 अंक गिरा

  • शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में कमजोरी

  • हैंग सेंग इंडेक्स 2% से अधिक फिसला

  • ताइवान स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक भी 2% से ज्यादा टूटा

कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे बाजारों में और अस्थिरता आ सकती है।

विश्लेषकों के मुताबिक, निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।

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Author: Deepak Mittal

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