नई दिल्ली: वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर सक्रिय कूटनीति के जरिए नया रिकॉर्ड बनाया है। फरवरी 2026 तक वे 79 देशों की 99 आधिकारिक यात्राएं कर चुके हैं और 19 विदेशी संसदों को संबोधित कर चुके हैं।
Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह देश के “ग्लोबल कद, डिप्लोमैटिक क्रेडिबिलिटी, लीडरशिप और मोरल अथॉरिटी” को दर्शाता है। पार्टी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी विदेशी संसदों में बोलते हैं, तो दुनिया उन्हें सुनती है।
इन प्रमुख संसदों को किया संबोधित
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण देशों की संसदों को संबोधित किया है, जिनमें शामिल हैं:
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United States Congress (जॉइंट सेशन) – 2016 और 2023
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Knesset – इज़राइल
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Parliament of the United Kingdom – 2015
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Parliament of Australia – 2014
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Parliament of Sri Lanka – 2015
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National Assembly of Mauritius – 2015
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State Great Khural – 2015
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Parliament of Afghanistan – 2015
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Parliament of Uganda – 2018
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People’s Majlis – 2019
इसके अलावा 2024–25 के दौरान उन्होंने गुयाना, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, नामीबिया और इथियोपिया की संसदों को भी संबोधित किया।
अन्य प्रधानमंत्रियों से तुलना
आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री
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Manmohan Singh ने 7 विदेशी संसदों को संबोधित किया।
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Indira Gandhi ने 4।
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Jawaharlal Nehru ने 3।
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Rajiv Gandhi और Atal Bihari Vajpayee ने 2-2 विदेशी संसदों को संबोधित किया।
इस लिहाज से नरेंद्र मोदी विदेशी संसदों को संबोधित करने वाले भारतीय प्रधानमंत्रियों में शीर्ष पर हैं।
लोकतंत्र पर दिया विशेष जोर
अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था, “डेमोक्रेसी एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जो डिबेट और डायलॉग का स्वागत करता है… भारत डेमोक्रेसी की जननी है।”
इज़राइल की संसद (नेसेट) को संबोधित करते हुए उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले का जिक्र किया और इज़राइली नागरिकों की मौत पर शोक जताया।
भारत की वैश्विक छवि को मजबूती
भाजपा का दावा है कि इन यात्राओं और संबोधनों ने भारत की वैश्विक छवि को मजबूत किया है, साथ ही व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा दी है।
फरवरी 2026 तक 79 देशों की 99 यात्राएं और 19 संसदों को संबोधित करना भारतीय कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
Author: Deepak Mittal










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