नारायणपुर से विकास की नई रोशनी, प्रशासनिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय
रायपुर।,छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए वीरेंद्र बहादुर पंचभाई को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अवार्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान न केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रशासनिक तंत्र की गरिमा और प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई देने वाला ऐतिहासिक क्षण भी है।
सहायक प्राध्यापक के पद से शासकीय सेवा की शुरुआत करने वाले पंचभाई का प्रशासनिक सफर असाधारण प्रेरणादायी रहा है।
नायब तहसीलदार → तहसीलदार → डिप्टी कलेक्टर → संयुक्त कलेक्टर → एसडीएम → अपर कलेक्टर → सीनियर अपर कलेक्टर जैसे विभिन्न दायित्वों का सफल निर्वहन करते हुए उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति प्राप्त की।
रैंक से IAS तक का यह ऐतिहासिक सफर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रशासनिक जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। जैसे ही इस सम्मान की आधिकारिक स्वीकृति की खबर सामने आई, पूरे प्रदेश में गर्व और प्रसन्नता का वातावरण बन गया।

नारायणपुर में विकास, विश्वास और सकारात्मक प्रशासन की मिसाल
वर्तमान में नारायणपुर जिले में अपर कलेक्टर के रूप में पदस्थ पंचभाई घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रशासनिक वातावरण तैयार कर रहे हैं।
जल, जंगल और पहाड़ों से घिरे इस संवेदनशील अंचल में उन्होंने प्रशासन को केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जनसेवा का प्रभावी माध्यम बनाया है।

उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ—
दूरस्थ गांवों तक योजनाओं की वास्तविक पहुँच
जनसमस्याओं का त्वरित और संवेदनशील समाधान
प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता
विकास कार्यों में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही
आज नारायणपुर में उनका नाम एक ऐसे अधिकारी के रूप में लिया जाता है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी आशा, विश्वास और उत्साह का वातावरण तैयार किया।
वे वहाँ केवल पदाधिकारी नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का चेहरा बन चुके हैं।
दल्लीराजहरा से जुड़ी स्मृतियाँ, आज भी लोगों के दिलों में जीवित
नारायणपुर में कार्यरत होने के बावजूद दल्लीराजहरा में उनका नाम आज भी सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है।
तहसीलदार के रूप में उनके कार्यकाल में—
शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना
नगर की आवागमन व्यवस्था को व्यवस्थित करना
आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान
प्रशासन को संवेदनशील, सरल और जनोन्मुख बनाना
इन कार्यों ने उन्हें एक जनप्रिय अधिकारी के रूप में स्थापित किया, जिसकी स्मृतियाँ आज भी नगरवासियों के मन में जीवित हैं।
संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक जीवनी
वर्ष 1993: अविभाजित मध्यप्रदेश में आरक्षित कोटे से नायब तहसीलदार के रूप में सेवा की शुरुआत
प्रारंभिक सेवाएँ: अभनपुर में नायब तहसीलदार व तहसीलदार
वर्ष 2010: राज्य प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति
रायपुर: लंबे समय तक अपर कलेक्टर के रूप में सफल कार्यकाल
वर्तमान: नारायणपुर जिले में अपर कलेक्टर के रूप में पदस्थ
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब नायब तहसीलदार रैंक से कोई अधिकारी IAS तक पहुँचा है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रेरणा का प्रतीक बना यह सफर
उनका जीवन यह संदेश देता है कि—
संघर्ष + समर्पण + ईमानदारी + निरंतर मेहनत = असंभव भी संभव।
आज वे युवा अधिकारियों, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन चुके हैं।
IAS वीरेंद्र बहादुर पंचभाई आज केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि—
प्रशासन के लिए कर्तव्यनिष्ठ नेतृत्व का उदाहरण
युवाओं के लिए संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी
जनता के लिए विश्वास और सेवा का प्रतीक
उनका जीवन और कार्य यह सिद्ध करता है कि—
जहाँ सोच बड़ी होती है, वहाँ इतिहास बनता है।
जहाँ सेवा भाव होता है, वहाँ समाज आगे बढ़ता है।
छत्तीसगढ़ शासन का यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति का गौरव है, बल्कि पूरे प्रदेश की प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक है।
नवभारत टाइम्स 24×7 .in से
वीरेंद्र बहादुर पंचभाई कहते हैं—
“यह उपलब्धि मेरी अकेले की नहीं है। यह उन सभी लोगों की है जिन्होंने मेरे संघर्ष में मेरा साथ दिया—मेरे परिवार, वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों और आम नागरिकों की शुभकामनाएँ मेरी सबसे बड़ी ताकत रही हैं।
मैंने हमेशा यही माना कि प्रशासन का असली उद्देश्य सेवा है। यदि अधिकारी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ काम करें, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं।
आज जो सम्मान मिला है, वह मुझे और अधिक जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ जनता की सेवा करने की प्रेरणा देता है।”
Author: Deepak Mittal










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