नई दिल्ली: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने गुरुवार को संपन्न हुए चुनाव को “इंडस्ट्रियल लेवल पर प्रशासनिक हेरफेर और आंकड़ों की धोखाधड़ी” करार देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
शुक्रवार को जारी बयान में Bangladesh Awami League की अध्यक्ष हसीना ने मतदान प्रतिशत के आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शुरुआती घंटों में मतदान बेहद कम था, लेकिन बाद में जारी आंकड़ों में “अवास्तविक और असामान्य उछाल” दिखा।
वोटिंग पैटर्न पर उठाए सवाल
हसीना के मुताबिक, सुबह 11 बजे तक पहले साढ़े तीन घंटे में केवल 14.96 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था, जो कुल 1,91,05,684 वोट के बराबर है। उनका दावा है कि इसके बाद महज एक घंटे में मतदान प्रतिशत 32.88 तक पहुंच गया, जो “व्यावहारिक रूप से असंभव” प्रतीत होता है।
उन्होंने गणना प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस रफ्तार से हर मिनट लाखों वोट डाले जाने का दावा किया गया, जो पोलिंग स्टेशनों पर दिखे वास्तविक हालात से मेल नहीं खाता। बयान में यह भी कहा गया कि यदि सभी 32,789 मतदान केंद्र सक्रिय थे, तो हर केंद्र पर हर पांच सेकंड में एक वोट पड़ना चाहिए था, जो “अविश्वसनीय” है।
हिंसा और गड़बड़ियों के आरोप
हसीना ने चुनाव पूर्व हिंसा, हथियारों की जब्ती, वोट खरीदने के लिए धन के इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के आरोप भी लगाए। उन्होंने बोगस वोटिंग और जनमत संग्रह के नतीजों की घोषणा में कथित देरी पर भी सवाल उठाए।
अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे Muhammad Yunus पर निशाना साधते हुए हसीना ने चुनाव रद्द करने, यूनुस के इस्तीफे, “झूठे मामलों” को वापस लेने, राजनीतिक कैदियों की रिहाई और अवामी लीग पर लगी रोक हटाने की मांग की।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया नहीं
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चुनाव और जनमत संग्रह को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
Author: Deepak Mittal









