पुरानी पानी की बोतल बन सकती है सेहत के लिए खतरा, जानिए कैसे पेट में घोल सकती है जहर

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दिल्ली: शरीर को हाइड्रेटेड रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से अधिकतर लोग घर से अपनी पानी की बोतल साथ लेकर निकलते हैं। लेकिन अक्सर एक छोटी सी लापरवाही बड़ी समस्या बन सकती है—महीनों तक एक ही बोतल का इस्तेमाल करना। विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी और ठीक से साफ न की गई बोतल में रखा पानी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

बोतल में पनप सकते हैं बैक्टीरिया और वायरस

विज्ञान और आयुर्वेद दोनों के अनुसार पानी तभी सुरक्षित रहता है जब उसे स्वच्छ और उचित बर्तन में रखा जाए। प्लास्टिक या अन्य सामग्री की बोतलों में समय के साथ बैक्टीरिया, वायरस और फंगस पनपने लगते हैं। खासतौर पर तब, जब बोतल को बार-बार इस्तेमाल किया जाए और उसकी नियमित सफाई न हो।

अगर एक ही बोतल में दो-तीन दिन से ज्यादा समय तक पानी रखा जाए या महीनों तक उसे बिना बदले उपयोग किया जाए, तो यह पेट दर्द, उल्टी, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

आयुर्वेद में क्या कहा गया है?

आयुर्वेद के अनुसार, ताजा और शुद्ध जल ही शरीर के लिए जीवनदायिनी होता है। दूषित पानी पाचन तंत्र और मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। लगातार गंदी या पुरानी बोतल में रखा पानी पीने से शरीर में वात और पित्त का असंतुलन बढ़ सकता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है।

कितने समय में बदलें बोतल?

विशेषज्ञों की सलाह है कि प्लास्टिक की बोतलों को हर 6 से 12 महीने में बदल देना चाहिए। साथ ही, रोजाना या कम से कम दो-तीन दिन में बोतल को अच्छी तरह साबुन और गर्म पानी से साफ करना जरूरी है। अगर बोतल से बदबू आने लगे या उस पर धब्बे और निशान दिखाई दें, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।

स्टील और कांच की बोतल बेहतर विकल्प

इन दिनों बाजार में स्टेनलेस स्टील और कांच की बोतलों का चलन बढ़ रहा है। ये बोतलें अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना कम होती है। साथ ही, इन बर्तनों में रखा पानी लंबे समय तक ताजा और स्वच्छ बना रहता है।

निष्कर्ष: सिर्फ पानी की शुद्धता ही नहीं, बल्कि जिस बोतल में पानी रखा जा रहा है उसकी सफाई और गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। छोटी सी सावधानी आपको बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है।

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Author: Deepak Mittal

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