रायपुर: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने मीसाबंदियों (लोकतंत्र सेनानियों) को दी जाने वाली पेंशन को पुनः प्रारंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसकी जानकारी देते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों को नमन किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि “मां भारती के सच्चे सपूत कोमलचंद जैन एवं शिव कुमार सोनी जी को मेरा बारंबार प्रणाम। साथ ही उन एक लाख से अधिक मीसाबंदियों के तप, त्याग और बलिदान को नमन, जिन्होंने दमनकारी सोच के विरुद्ध संघर्ष कर लोकतंत्र-विरोधी साजिशों को नाकाम किया।”
सीएम साय ने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र का “काला दिन” बताते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और स्वतंत्रता पर आघात किया गया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में मीसाबंदियों के साहस और संघर्ष ने देश के लोकतंत्र को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा रोकी गई पेंशन को उनकी सरकार ने फिर से शुरू किया है। साथ ही विधिक प्रावधान कर लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों के सम्मान, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को स्थायी संरक्षण प्रदान किया गया है।
सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
Author: Deepak Mittal










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