Lifestyle: लिवर की बीमारियां अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती हैं और शुरुआती दौर में इनके लक्षण साफ तौर पर नजर नहीं आते। इसी वजह से कई बार लोग समय रहते बीमारी को पहचान नहीं पाते और स्थिति गंभीर हो जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक, लिवर से जुड़ी समस्याओं के संकेत हमारी त्वचा पर भी दिखाई देते हैं। ये लक्षण भले ही हल्के हों, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि त्वचा में होने वाले कुछ बदलाव हेपेटाइटिस, फैटी लिवर और लिवर फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे में इन संकेतों को पहचानकर समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है।
त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
पीलिया लिवर खराब होने का सबसे आम लक्षण माना जाता है। जब लिवर बिलीरुबिन को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता, तो यह खून और टिशू में जमा होने लगता है। इसका असर त्वचा और आंखों पर पड़ता है और वे पीली नजर आने लगती हैं। यह लिवर की गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
त्वचा पर स्पाइडर वेन्स दिखना
चेहरे, गर्दन, हाथों या छाती पर लाल रंग की जाले जैसी नसें दिखना भी लिवर की खराबी का संकेत हो सकता है। यह तब होता है, जब लिवर एस्ट्रोजन हार्मोन को सही तरीके से मेटाबोलाइज नहीं कर पाता। यह लक्षण खासतौर पर लंबे समय से लिवर रोग से पीड़ित लोगों और अधिक शराब पीने वालों में देखा जाता है। अगर ये नसें अचानक नजर आने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
हथेलियों में लालिमा
हाथों की हथेलियों, अंगूठे और छोटी उंगली के नीचे का हिस्सा लगातार लाल रहना भी क्रॉनिक लिवर डिजीज का संकेत हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण ऐसा होता है। फैटी लिवर, ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस और लिवर स्ट्रेस से जूझ रहे मरीजों में यह लक्षण आम है।
तेज खुजली या दर्द
लिवर फेल होने की स्थिति में पित्त एसिड खून में जमा हो जाते हैं, जिससे त्वचा में तेज खुजली और दर्द हो सकता है। यह समस्या खासकर रात में ज्यादा बढ़ जाती है और हाथों-पैरों सहित शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। कोलेस्टेसिस और प्राइमरी बिलियरी कोलेंजाइटिस जैसी बीमारियों में यह लक्षण देखा जाता है।
त्वचा पर काले धब्बे पड़ना
कई मामलों में त्वचा, आंखों, मुंह और बगल के आसपास काले धब्बे पड़ने लगते हैं। यह हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और लिवर फेलियर के कारण मेलेनिन बढ़ने से होता है। स्टडीज़ के अनुसार, हेमोक्रोमैटोसिस, ऑटोइम्यून लिवर डिजीज और नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस के मरीजों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, शराब से दूरी और समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट कराना लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। लिवर से जुड़ी बीमारी का समय पर पता चल जाए, तो गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है और जान भी बचाई जा सकती है।
Author: Deepak Mittal










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