नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 1,986.48 करोड़ रुपये मूल्य की 37 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। कुर्क की गई संपत्तियां लुधियाना (पंजाब) और जयपुर (राजस्थान) में स्थित हैं।
ईडी के अनुसार, इन 37 संपत्तियों की पहचान निवेशकों से जुटाए गए धन से खरीदी गई संपत्तियों के रूप में की गई है, जो अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की श्रेणी में आती हैं। इस ताजा कार्रवाई के साथ ही ईडी अब तक भारत और विदेशों में स्थित करीब 7,589 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।
ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय-II ने यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 19 फरवरी 2014 को दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई जांच के दौरान की। एजेंसी की जांच में सामने आया कि पीएसीएल और उससे जुड़ी संस्थाओं ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर एक अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाई, जिसके जरिए देशभर के लाखों निवेशकों से 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई।
ईडी ने बताया कि निवेशकों को नकद अग्रिम भुगतान और किस्तों के माध्यम से निवेश के लिए प्रेरित किया गया और उनसे भ्रामक दस्तावेजों—जैसे समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी आदि—पर हस्ताक्षर करवाए गए। अधिकांश मामलों में निवेशकों को न तो जमीन आवंटित की गई और न ही करीब 48,000 करोड़ रुपये की राशि वापस की गई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि धोखाधड़ी को छिपाने और अवैध लाभ अर्जित करने के लिए कई फर्जी कंपनियों और रिवर्स सेल लेनदेन का इस्तेमाल किया गया। भोले-भाले निवेशकों से जुटाई गई रकम को विभिन्न संबंधित और गैर-संबंधित संस्थाओं के जरिए घुमाकर दिवंगत निर्मल सिंह भंगू, उनके परिजनों, सहयोगियों और पीएसीएल से जुड़ी संस्थाओं के खातों में डाला गया, जिसके बाद इन पैसों से अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
ईडी ने बताया कि इस मामले में प्रेम कौर, बरिंदर कौर, सुखविंदर कौर, गुरप्रताप सिंह और प्रतीक कुमार के खिलाफ अनिश्चितकालीन गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। एजेंसी ने 2016 में ईसीआईआर दर्ज की थी और 2018 में अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसके बाद 2022 और 2025 में पूरक अभियोजन शिकायतें भी दायर की गईं। विशेष पीएमएलए अदालत ने अब तक सभी अभियोजन शिकायतों का संज्ञान ले लिया है।
Author: Deepak Mittal










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