भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द हो सकता है अंतिम, अधिकांश मुद्दों पर बनी सहमति

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वाशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत में अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, हालांकि आयात-निर्यात शुल्क और समझौते को लागू करने के क्रम जैसे कुछ संवेदनशील विषयों पर अभी भी चर्चा जारी है। दोनों पक्ष ऐसा समझौता चाहते हैं, जिससे आपसी व्यापार में स्थिरता और भरोसा बना रहे।

पिछले कुछ हफ्तों में वार्ता में तेजी आई है और अब केवल गिने-चुने मुद्दे ही शेष हैं। बातचीत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तकनीकी स्तर पर मंथन जारी है। एक बार अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और भारत के वाणिज्य मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद समझौते को अंतिम स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष रखा जाएगा। बीते महीनों में दोनों नेताओं के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई है, जिसमें इस प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। दावोस में भी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच मजबूत व्यापार समझौते को लेकर भरोसा जताया था।

इस लंबे समय से प्रतीक्षित समझौते का एक बड़ा असर यह हो सकता है कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए। यह शुल्क पिछले साल गर्मियों से लागू है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारतीय वस्त्र उद्योग पर पड़ा। हालांकि अधिकारियों के अनुसार, इसके बावजूद दोनों देशों के कुल व्यापार में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक स्थिति मिली-जुली रही है—वस्त्र और परिधान क्षेत्र पर दबाव बना रहा, जबकि कुछ श्रेणियों में मामूली बढ़त भी देखने को मिली। दवा उद्योग के निर्यात में भी ऐसा ही रुझान सामने आया है।

इस बीच अमेरिका में कानूनी अनिश्चितता भी एक चिंता का विषय बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि टैरिफ से जुड़े अधिकारों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का संभावित फैसला फिलहाल बातचीत को सीधे प्रभावित नहीं कर रहा, लेकिन भविष्य में यह जोखिम बना रह सकता है। वहीं अमेरिकी कांग्रेस में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर समर्थन मजबूत बताया जा रहा है और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता आर्थिक रिश्तों को और प्रगाढ़ करने के पक्ष में हैं।

इसके साथ ही, इमिग्रेशन से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का भी कारोबारी माहौल पर असर पड़ा है। कुशल कामगार वीजा पर शुल्क बढ़ाए जाने से कंपनियों और पेशेवरों में चिंता देखी जा रही है। भले ही ये मुद्दे सीधे तौर पर व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों को लेकर धारणा जरूर प्रभावित हो रही है। सूत्रों के अनुसार, यदि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ऐसा कोई फैसला देता है जिससे कुछ शुल्कों की कानूनी वैधता प्रभावित होती है, तो अमेरिका को अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिसका असर भविष्य की व्यापार नीति पर पड़ सकता है।

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Author: Deepak Mittal

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