नई दिल्ली: अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखने वाले एक भारतीय परिवार के लिए यह सपना आखिरकार भारी कर्ज और गहरी चिंता में बदल गया। अपने दोनों बेटों को अमेरिका भेजने के लिए एक पिता ने करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज ले लिया, लेकिन सख्त वीजा नियमों और सीमित नौकरियों के चलते बच्चों को लंबे समय तक नौकरी नहीं मिल पाई।
इस दर्दनाक कहानी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आदित्य नाम के एक यूजर ने साझा किया है। उन्होंने बताया कि उनके एक करीबी दोस्त ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने दोनों बेटों को अमेरिका में महंगे मास्टर डिग्री कोर्स के लिए भेजा। पढ़ाई पूरी होने तक पिता पर करीब 1.5 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका था।
आमतौर पर ऐसी डिग्री के बाद छात्रों को H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में आव्रजन नियमों में आई सख्ती ने हालात पूरी तरह बदल दिए। डिग्री पूरी होने के बाद दोनों बेटे नौकरी के लिए संघर्ष करते रहे, जबकि पिता भारत से लगातार पैसे भेजते रहे ताकि वे अमेरिका में रह सकें।
आदित्य के अनुसार, शुरुआत में पिता हर बेटे को करीब 1 लाख रुपये प्रति माह भेजते थे। हालात बिगड़ने पर यह रकम बढ़कर 2 लाख रुपये प्रति माह हो गई। इसी दौरान कुल कर्ज बढ़कर 2 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। बच्चों की पढ़ाई और रहने का खर्च उठाने के लिए पिता अपना फ्लैट बेचने तक को तैयार हो गए। इस बीच भारत में उनका कारोबार भी ठीक नहीं चल रहा था, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया।
काफी समय बाद परिवार को तब थोड़ी राहत मिली, जब बड़े बेटे का नाम H-1B वीजा लॉटरी में निकल गया और उसे अमेरिका में नौकरी मिल गई। हालांकि सैलरी ज्यादा नहीं है, लेकिन अब वह अपना खर्च खुद उठा पा रहा है।
आदित्य ने इस स्थिति को “भयावह” बताते हुए कहा कि आज हजारों भारतीय छात्र और उनके माता-पिता इसी तरह की परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि यदि आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, तो बच्चों को अमेरिका भेजने का फैसला बेहद सोच-समझकर करें। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे मामलों में आलोचना करने के बजाय सहानुभूति दिखाएं, क्योंकि युवा छात्र कम नौकरियों वाले बाजार और बढ़ते पारिवारिक कर्ज के बीच फंसे हुए हैं।
Author: Deepak Mittal










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